अर्नव पापरकर: विंबलडन में भारतीय टेनिस का नया सितारा

अर्नव पापरकर ने विंबलडन में लड़कों के सिंगल्स क्वार्टरफाइनल में पहुँचकर भारतीय टेनिस में एक नई उपलब्धि हासिल की है। उनके कोच प्रोसोन्जित पॉल ने उन्हें हार से सीखने और बेहतर बनने की प्रेरणा दी। जानें कैसे अर्नव का खेल विकसित हुआ है और वह एटीपी टूर में अपनी जगह बनाने के लिए कैसे तैयार हो रहे हैं।
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अर्नव पापरकर की ऐतिहासिक उपलब्धि

अर्नव पापरकर ने विंबलडन में लड़कों के सिंगल्स क्वार्टरफाइनल में पहुंचकर 36 वर्षों में यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले भारतीय बनकर इतिहास रच दिया है। यह उपलब्धि आखिरी बार 1990 में लियंडर पेस द्वारा हासिल की गई थी। अधिकांश युवा खिलाड़ियों के लिए ग्रैंड स्लैम जीतने से केवल तीन जीत दूर रहना निराशाजनक हो सकता है, लेकिन अर्नव को उनके कोच प्रोसोन्जित पॉल ने सिखाया कि हार से डरना नहीं चाहिए। वास्तव में, पॉल ने उन्हें हारने के लिए प्रशिक्षित किया, ताकि वे सीख सकें और बेहतर खिलाड़ी बन सकें।


कोच का दृष्टिकोण

पॉल ने बताया कि अर्नव की खेल के प्रति सोच बहुत अलग थी। "वह कभी जीतने या हारने की चिंता नहीं करता था। सात साल की उम्र में ही वह खेल सीखने के प्रति पूरी तरह समर्पित था। उसकी प्रेरणा हमेशा बेहतर खिलाड़ी बनने की थी, न कि केवल जीत हासिल करने की," उन्होंने कहा।

पॉल ने जानबूझकर अर्नव को बड़े आयु वर्ग के टूर्नामेंट में शामिल किया, जहां उसे अधिक अनुभवी खिलाड़ियों के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। उनका उद्देश्य यह था कि अर्नव समझे कि हमेशा बेहतर खिलाड़ी होते हैं और उसे चुनौतियों का सामना करने के लिए बेहतर बनना होगा।


खेल में विकास

पापरकर का खेल कैसे विकसित हुआ?

पापरकर का खेल वर्षों में काफी विकसित हुआ है, और पॉल का मानना है कि उसकी सर्विस में सबसे बड़ा सुधार हुआ है, जो अब उसके खेल का एक मजबूत पहलू बन गई है। "जब वह छोटा था, तो उसकी ऊंचाई कम थी, लेकिन अब वह शारीरिक रूप से बड़ा हो गया है, और उसकी सर्विस एक असली हथियार बन गई है," कोच ने कहा।

पॉल ने यह भी बताया कि अर्नव की तकनीकी खेल हमेशा मजबूत रही है। "तकनीकी रूप से, वह हमेशा बहुत सक्षम रहा है। उसकी ग्राउंडस्ट्रोक्स उत्कृष्ट थीं, और उसकी बैकहैंड हमेशा उसकी सबसे बड़ी ताकत रही है।"


एटीपी टूर की तैयारी

एटीपी टूर के लिए तैयारी

अर्नव अब 18 वर्ष का है और वह सीनियर सर्किट में प्रवेश करने जा रहा है, जहां उसकी करियर की सबसे कठिन चुनौती शुरू होगी। पॉल का मानना है कि जूनियर टेनिस और प्रोफेशनल टेनिस में पूरी तरह से अलग गुणों की आवश्यकता होती है।

"जूनियर्स में खिलाड़ी बहुत स्थिर होते हैं, लेकिन गति धीमी होती है। जब वे पुरुष टेनिस में प्रवेश करते हैं, तो उनकी सर्विस और फोरहैंड को बड़ा बनाना आवश्यक है," उन्होंने समझाया।


पॉल का विश्वास

'वह एटीपी के लिए बने हैं': प्रोसोन्जित पॉल

हाल के समय में बहुत से भारतीय एटीपी सर्किट में सफल नहीं हुए हैं, लेकिन पॉल का मानना है कि अर्नव में एटीपी और ग्रैंड स्लैम स्तर पर सफल होने की सभी विशेषताएँ हैं।

"जब अर्नव लगभग 12 साल का था, तब मैंने पहले ही मान लिया था कि वह एटीपी टूर के लिए बना है। उसकी सबसे बड़ी प्रगति अब शारीरिक रूप से होनी चाहिए। उसकी फिटनेस और ताकत में सुधार की आवश्यकता है।"