ज्ञानेश्वरी यादव ने राष्ट्र के लिए जीता रजत पदक, साझा की अपनी यात्रा

ज्ञानेश्वरी यादव ने कॉमनवेल्थ गेम्स में महिलाओं की 53 किलोग्राम श्रेणी में रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। इस युवा भारोत्तोलक ने अपनी कठिनाइयों और प्रेरणाओं के बारे में खुलकर बात की। जानें उनके संघर्ष, परिवार का समर्थन और मीराबाई चानू से मिली प्रेरणा के बारे में। उनकी कहानी हर युवा खिलाड़ी के लिए प्रेरणा है।
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ज्ञानेश्वरी यादव की सफलता की कहानी


भारतीय भारोत्तोलक ज्ञानेश्वरी यादव ने सोमवार (27 जुलाई) को महिलाओं की 53 किलोग्राम श्रेणी में 199 किलोग्राम उठाकर देश के लिए पहला रजत पदक जीता। 23 वर्षीय खिलाड़ी ने स्वर्ण पदक जीतने का प्रयास किया, लेकिन नाइजीरिया की ओनोमे ओमोलोला डिडिह के बाद दूसरे स्थान पर रहीं। ज्ञानेश्वरी ने स्नैच इवेंट में 82 किलोग्राम उठाने से शुरुआत की और फिर 85 किलोग्राम और 88 किलोग्राम उठाए। क्लीन एंड जर्क में उन्होंने 103 किलोग्राम उठाया और इसके बाद 107 किलोग्राम और 111 किलोग्राम उठाए।


पदक जीतने के बाद एक विशेष बातचीत में, ज्ञानेश्वरी ने अपनी कठिनाइयों, तैयारी और भारतीय दिग्गज मीराबाई चानू से मिली प्रेरणा के बारे में बताया।


प्रश्न: कॉमनवेल्थ गेम्स में यह पदक जीतना आपके लिए कितना आसान या कठिन था? आपकी तैयारी कैसी थी?


ज्ञानेश्वरी: मेरी तैयारी बहुत अच्छी चल रही थी। हम बर्मिंघम में एक महीने तक प्रशिक्षण कर रहे थे। मैंने सोचा था कि मुझे भारत के लिए पदक जीतना है और स्वर्ण पदक की उम्मीद थी। नाइजीरिया की प्रतिस्पर्धा ने मुझे और बेहतर करने के लिए प्रेरित किया। इस पदक से मैं खुश हूं।


प्रश्न: आपने इस पदक को किसे समर्पित किया? आपने पदक जीतने के बाद पहले किससे बात की?


ज्ञानेश्वरी: मैंने सबसे पहले अपनी मां को फोन किया। मैंने उन्हें वीडियो कॉल करके पदक दिखाया। परिवार के लोग इस पल का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। जब मैंने मां को पदक दिखाया, तो वह भावुक हो गईं। मैं इस पदक को अपने माता-पिता को समर्पित करना चाहती हूं, जिन्होंने मेरे लिए बहुत मेहनत की है।


प्रश्न: आपके पिता ने आपके लिए कितनी मेहनत की है, क्या आप इसके बारे में कुछ बता सकती हैं?


ज्ञानेश्वरी: मैं राजनंदगांव के छोटे से गांव भोड़िया से हूं। मेरे पिता ने मुझे स्कूल से घर लाने और ले जाने के लिए बहुत मेहनत की। उन्होंने हमेशा मेरी डाइट और किट का ध्यान रखा। उनके प्रयासों का ही नतीजा है कि मैं आज यहां हूं।


प्रश्न: मीराबाई चानू आपके लिए कितनी प्रेरणा हैं?


ज्ञानेश्वरी: मीराबाई दीदी हमारे लिए बहुत बड़ी प्रेरणा हैं। जब मैंने पदक जीता, तो उन्होंने मुझे गले लगाया और कहा कि तुमने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया।


प्रश्न: आप अन्य लड़कियों को क्या संदेश देना चाहेंगी जो खेलों में आना चाहती हैं?


ज्ञानेश्वरी: मैं चाहती हूं कि लड़कियां किसी भी क्षेत्र में पीछे न रहें। मेहनत करें और अपने सपनों को पूरा करें।


प्रश्न: आपके अगले महत्वपूर्ण टूर्नामेंट कौन से हैं?


ज्ञानेश्वरी: अगला टूर्नामेंट एशियाई खेल हैं, और मेरी तैयारी अब और बेहतर होनी चाहिए।