कुमार संगकारा ने 2009 के लाहौर आतंकवादी हमले के प्रभाव पर की चर्चा

कुमार संगकारा ने 2009 में लाहौर में हुए आतंकवादी हमले के प्रभाव पर अपने विचार साझा किए हैं। उन्होंने बताया कि इस घटना ने उनके जीवन और नायकत्व के प्रति दृष्टिकोण को कैसे बदल दिया। संगकारा ने हमले के समय की घटनाओं को याद करते हुए कहा कि यह अनुभव उन्हें गहरी कृतज्ञता और नई दृष्टि प्रदान करता है। जानें इस हमले के बाद उनके जीवन में आए बदलावों के बारे में।
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संगकारा का अनुभव और जीवन पर प्रभाव

श्रीलंका के पूर्व कप्तान कुमार संगकारा ने 2009 में लाहौर में हुए आतंकवादी हमले के प्रभाव पर अपने विचार साझा किए हैं। उन्होंने बताया कि इस घटना ने उनके जीवन, विशेषाधिकार और नायकत्व के प्रति दृष्टिकोण को कैसे बदल दिया। एक हालिया साक्षात्कार में संगकारा ने उस भयानक क्षण को याद किया जब 3 मार्च 2009 को श्रीलंकाई टीम की बस पर हमला किया गया था। उन्होंने कहा, 'हम होटल में थे, तीसरे दिन, मैदान की ओर जा रहे थे और सामने बैठे तेज गेंदबाज ने कहा, 'मेरी पीठ इन सपाट पिचों पर टूटने वाली है, मुझे उम्मीद है कि कोई बम फटेगा और हम घर जाएंगे।' संगकारा ने कहा, 'एक मिनट भी नहीं हुआ था कि हम पर हमला हो गया।'

इस हमले में कई श्रीलंकाई खिलाड़ी और स्टाफ घायल हुए, जबकि छह पुलिसकर्मी और टीम को escort कर रहे ड्राइवर की जान चली गई। संगकारा ने खुद भी इस घटना में चोटें खाई थीं। उन्होंने कहा कि इस अनुभव ने उनके दृष्टिकोण को बदल दिया। 'मुझे कोई बुरे सपने नहीं आए, लेकिन इसने मुझे गहरी कृतज्ञता और उस समय श्रीलंका में हो रही घटनाओं पर एक नई दृष्टि दी,' उन्होंने कहा। 'हम 2009 में युद्ध के अंतिम चरणों से गुजर रहे थे, और यह हमारे साथ दो मिनट के लिए हुआ, और हम सुर्खियों में आ गए।'

कुछ हफ्तों बाद, कोलंबो में एक बातचीत ने उनके दृष्टिकोण को और मजबूत किया। एक पुलिस अधिकारी ने उनसे कहा, 'आप लोग हमारे नायक हैं!' संगकारा ने इस भावना को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें यह एहसास हुआ कि उनके जीवन और सशस्त्र बलों द्वारा किए गए बलिदानों के बीच कितना बड़ा अंतर है।