अनाहत सिंह की ऐतिहासिक जीत और ओलंपिक की तैयारी

अनाहत सिंह ने जूनियर स्क्वाश विश्व चैंपियनशिप में ऐतिहासिक जीत हासिल की है और अब वह 2028 लॉस एंजेलेस ओलंपिक में भाग लेने की तैयारी कर रही हैं। उन्होंने एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने की उम्मीद जताई है। इस लेख में, अनाहत की यात्रा, उनके लक्ष्य और स्क्वाश के ओलंपिक में शामिल होने के महत्व पर चर्चा की गई है।
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अनाहत सिंह का ओलंपिक सपना

जूनियर स्क्वाश विश्व चैंपियनशिप में ऐतिहासिक जीत के बाद, अनाहत सिंह ने 2028 लॉस एंजेलेस ओलंपिक पर ध्यान केंद्रित किया है, जहां स्क्वाश पहली बार ओलंपिक में शामिल होगा। उन्होंने 2026 एशियाई खेलों में भी अच्छा प्रदर्शन करने की उम्मीद जताई, जो इस साल 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक जापान के आइची प्रांत और नागोया में आयोजित होंगे। भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) द्वारा आयोजित एक विशेष वर्चुअल मीडिया बातचीत में, अनाहत ने ओलंपिक में खेलने की अपनी आकांक्षा व्यक्त की और कहा कि वह एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने की उम्मीद कर रही हैं।

अनाहत ने कहा, "हर स्क्वाश खिलाड़ी इस बात से बहुत खुश है कि स्क्वाश ओलंपिक में शामिल हो रहा है। यह पहली बार है जब यह ओलंपिक का हिस्सा है। पहले कॉमनवेल्थ खेल सबसे बड़े आयोजन थे, लेकिन अब ओलंपिक में शामिल होने से यह और भी महत्वपूर्ण हो गया है।" उन्होंने आगे कहा कि अगर वह एशियाई खेलों में क्वालीफाई कर जाती हैं, तो वह स्क्वाश से ओलंपिक में जाने वाली पहली खिलाड़ी बन जाएंगी।


एशियाई खेलों के लिए उत्साहित

2023 एशियाई खेलों में मिश्रित युगल और टीम में दो कांस्य पदक जीतने के बाद, अनाहत ने कहा कि वह इस साल के आयोजन के लिए उत्साहित हैं और उन पर कोई दबाव नहीं है। उन्होंने कहा, "एशियाई खेलों में भाग लेने का मौका मेरे मानसिकता को नहीं बदलेगा। यह मेरे लिए एक रोमांचक समय है।" उन्होंने यह भी कहा कि वह शीर्ष खिलाड़ियों के खिलाफ खेलने के लिए तैयार हैं और ओलंपिक का हिस्सा बनना एक अतिरिक्त बोनस है।


मिस्र के वर्चस्व को तोड़ना

अनाहत ने न केवल जूनियर विश्व चैंपियनशिप में भारत का पहला खिताब जीता, बल्कि उन्होंने मिस्र के 15 साल के वर्चस्व को भी तोड़ा। उन्होंने फाइनल में तीन मिस्री खिलाड़ियों को हराया, जिसमें रुकैया सलेम भी शामिल थीं। अनाहत ने कहा, "मेरे लिए यह मायने नहीं रखता कि प्रतिद्वंद्वी कौन है। हर मैच एक चुनौती है और मुझे हर बार अपना सर्वश्रेष्ठ देना होता है।" उन्होंने यह भी कहा कि यह उनका अंतिम वर्ष है और इससे उन पर अतिरिक्त दबाव था, लेकिन यह भी उन्हें बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करता है।