सदाबहार पौधे के अद्भुत लाभ और घरेलू उपचार
सदाबहार पौधे की विशेषताएँ
सदाबहार एक झाड़ीनुमा पौधा है। इसके गोलाकार पत्ते थोड़े लंबे, अंडाकार और अत्यधिक चमकदार होते हैं। जब यह पौधा एक बार जम जाता है, तो इसके आस-पास अन्य पौधे अपने आप उगने लगते हैं। इसके फूल पांच पंखुड़ियों वाले होते हैं और ये श्वेत, गुलाबी, जामुनी जैसे रंगों में खिलते हैं।
पत्ते और फल की सतह थोड़ी मोटी होती है। इसके मोटे और चिकने पत्तों के कारण पानी का वाष्पीकरण कम होता है, जिससे इसे कम पानी की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि इसे नयन तारा या सदाबहार नाम दिया गया है। इसके फूलों को तोड़ने पर भी ये ताजा रहते हैं और मंदिरों में पूजा के लिए इनका उपयोग किया जाता है।
इस पौधे के औषधीय गुणों के बारे में जानकारी है। भारत में प्राकृतिक चिकित्सक मधुमेह के रोगियों को इसके श्वेत फूल का सेवन सुबह खाली पेट करने की सलाह देते हैं। यह पौधा अपोनसाईनसियाई परिवार का हिस्सा है, जिसमें कनेर, प्लूमेरिया, सप्तपर्णीय करौंदा और अन्य लोकप्रिय पौधे शामिल हैं।
इस परिवार के पौधों की एक विशेषता यह है कि इन्हें तोड़ने पर एक गाढ़ा, चिपचिपा तरल निकलता है।
सदाबहार के घरेलू उपचार
1. त्वचा पर घाव होने पर आदिवासी लोग इसकी पत्तियों का रस दूध में मिलाकर लगाते हैं। उनका मानना है कि इससे घाव जल्दी भरता है।
2. सदाबहार की तीन-चार कोमल पत्तियाँ चबाने से मधुमेह में राहत मिलती है। आधे कप गर्म पानी में इसके तीन ताजे गुलाबी फूल 5 मिनट तक भिगोकर, फिर पानी सुबह खाली पेट पीने से लाभ होता है। यह प्रयोग 8 से 10 दिन तक करें।
3. पत्तियों से निकलने वाला दूध खाज-खुजली में लगाने से आराम मिलता है। इसे दिन में दो बार प्रभावित स्थान पर लगाना चाहिए।
4. सदाबहार के चार पत्तों को सुबह खाली पेट चबाने से मधुमेह में कमी आती है। यह प्रयोग कम से कम तीन महीने तक करना चाहिए।
5. इसकी पत्तियों का रस घाव पर लगाने से संक्रमण नहीं होता और घाव जल्दी भरता है।
6. बवासीर के लिए पत्तियों और फूलों को कुचलकर लगाने से तेजी से आराम मिलता है। आदिवासी जानकारों के अनुसार, इसे रात को सोने से पहले करना चाहिए।
7. मुहांसों पर इसके फूलों और पत्तियों के रस का लेप लगाने से कुछ ही दिनों में राहत मिलती है।
8. ततैया या मधुमक्खी के डंक पर इसके पत्तियों के रस का उपयोग करने से जल्दी आराम मिलता है।
