इंदौर में जल संरक्षण पर संगोष्ठी का आयोजन

इंदौर में श्री वैष्णव विद्यापीठ विश्वविद्यालय द्वारा जल संरक्षण पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में प्रमुख वक्ताओं ने जल के विवेकपूर्ण उपयोग और सतत विकास के महत्व पर चर्चा की। डॉ. जनक पलटा मगिलिगन और श्री सुधीन्द्र मोहन शर्मा ने अपने अनुभव साझा किए और जल संकट को वैश्विक समस्या बताया। संगोष्ठी का उद्देश्य विद्यार्थियों और शिक्षकों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करना था।
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इंदौर में जल संरक्षण पर संगोष्ठी का आयोजन gyanhigyan

जल के सतत विकास पर संगोष्ठी


इंदौर, 17 अप्रैल 2026 – श्री वैष्णव विद्यापीठ विश्वविद्यालय के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन सस्टेनेबल डेवलपमेंट (सीईएसडी) ने आज 17 अप्रैल 2026 को "मानव जिम्मेदारी: लोगों और पृथ्वी के सतत विकास के लिए जल का उपयोग" विषय पर एक प्रेरणादायक संगोष्ठी का आयोजन किया। यह कार्यक्रम "जिम्मी मगिलिगन स्मृति सस्टेनेबल डेवलपमेंट सप्ताह" के अंतर्गत आयोजित किया गया था, जो 15 से 21 अप्रैल 2026 तक चल रहा है। इसका मुख्य संदेश था "छोटे परिवर्तन, बड़ा प्रभाव – जल बचाएं".


कुलपति का स्वागत उद्बोधन


कार्यक्रम की शुरुआत माननीय कुलपति प्रोफेसर डॉ. योगेश सी. गोस्वामी के स्वागत उद्बोधन से हुई, जिसमें उन्होंने सतत विकास के सिद्धांतों और जल के विवेकपूर्ण उपयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।


प्रमुख वक्ताओं के विचार



  • पद्मश्री डॉ. (श्रीमती) जनक पलटा मगिलिगन ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि जल संरक्षण की जागरूकता उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। उन्होंने 25 वर्षों तक बरली विकास संस्थान में 6000 आदिवासी महिलाओं को सशक्त बनाने के कार्यों का उल्लेख किया।

  • प्रख्यात भूवैज्ञानिक श्री सुधीन्द्र मोहन शर्मा ने जल संकट को वैश्विक समस्या बताते हुए रोचक उदाहरण दिए और 7R सिद्धांत (Reduce, Reuse, Recycle, Recharge, Restore, Rejuvenate, Respect) पर चर्चा की।


संगोष्ठी का संदेश


डॉ. जनक पलटा मगिलिगन ने कहा,



"अपने आप विश्व का कल्याण नहीं होगा, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के प्रयासों से ही यह संभव है।"



कार्यक्रम का संचालन डॉ. उत्तम शर्मा और डॉ. श्वेता अग्रवाल ने किया। यह संगोष्ठी विद्यार्थियों, शिक्षकों और पर्यावरण प्रेमियों के लिए जल संरक्षण और सतत जीवनशैली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।