ITR4 फाइलिंग में नया नियम: अब बैंक बैलेंस बताना होगा अनिवार्य
बैंक बैलेंस की जानकारी देना होगा जरूरी
आर्थिक वर्ष 2026-27 के लिए ITR4 फाइल करने वाले करदाताओं के लिए अब अपने बैंक बैलेंस की जानकारी देना अनिवार्य कर दिया गया है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने इस बदलाव के माध्यम से आयकर रिटर्न फॉर्म को अधिक पारदर्शी और डेटा आधारित बनाने का निर्णय लिया है। 30 मार्च 2026 को जारी एक अधिसूचना के अनुसार, ITR4 में बैंक बैलेंस की जानकारी देना आवश्यक होगा।
पहले के नियम
पहले, ITR4 भरने वाले करदाताओं को केवल बैंक खाता संख्या, IFSC कोड और बैंक का नाम प्रदान करना होता था। असली बैंक बैलेंस की जानकारी देना आवश्यक नहीं था। लेकिन अब नए नियमों के तहत, बैंक बैलेंस की जानकारी देना अनिवार्य हो गया है।
इस बदलाव का प्रभाव
यह बदलाव विशेष रूप से उन व्यक्तियों पर प्रभाव डालेगा जो प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम के तहत ITR4 फाइल करते हैं। इसमें छोटे व्यवसायी, फ्रीलांसर, पेशेवर और कंसल्टेंट, परिवहन ऑपरेटर, और सैलरी के साथ साइड इनकम कमाने वाले लोग शामिल हैं। ये सभी आयकर अधिनियम की धारा 44AD, 44ADA और 44AE के तहत आते हैं।
टैक्स विभाग की नजर में वृद्धि
सीए डॉ. सुरेश सुराना के अनुसार, यह बदलाव मुख्य रूप से पारदर्शिता बढ़ाने के लिए किया गया है। इससे टैक्स विभाग आय और बैंक लेनदेन का बेहतर मिलान कर सकेगा। करदाताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी घोषित आय और बैंक ट्रांजैक्शन में कोई बड़ा अंतर न हो, अन्यथा जांच या नोटिस का जोखिम बढ़ सकता है।
सैलरी वालों की जिम्मेदारी
जो लोग नौकरी के साथ फ्रीलांसिंग, कंसल्टेंसी, डिजिटल प्लेटफॉर्म या छोटे कारोबार से अतिरिक्त कमाई करते हैं, उन्हें अब अधिक सावधानी से ITR भरना होगा। उन्हें अपनी साइड इनकम, बैंक रिसीट और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड का सही मिलान रखना पड़ेगा।
क्या CA की मदद जरूरी होगी?
सरकार लगातार ITR फॉर्म में अधिक खुलासा और रिपोर्टिंग नियम जोड़ रही है ताकि टैक्स सिस्टम को मजबूत बनाया जा सके। अब टैक्स विभाग तकनीक और ऑटोमैटिक डेटा मिलान का अधिक उपयोग कर रहा है। छोटी गलती या जानकारी छूटने पर भी नोटिस आ सकता है। डॉ. सुराना के अनुसार, छोटे व्यवसायियों, फ्रीलांसरों और विभिन्न स्रोतों से कमाई करने वालों के लिए पेशेवर मदद लेना फायदेमंद हो सकता है, ताकि ITR सही तरीके से भरा जा सके और भविष्य में किसी भी परेशानी से बचा जा सके।
