स्वालबार्ड ग्लोबल सीड वॉल्ट: भविष्य के लिए कृषि बीजों का सुरक्षित भंडार

स्वालबार्ड ग्लोबल सीड वॉल्ट, नॉर्वे में स्थित एक अनोखी तिजोरी है, जो कृषि बीजों का सुरक्षित भंडार है। यह तिजोरी प्राकृतिक या मानव निर्मित आपदाओं के समय में फसलों को पुनर्जीवित करने के लिए बनाई गई है। इसमें भारत का सबसे बड़ा योगदान है, जो कुल 15% बीजों का हिस्सा रखता है। जानें इस तिजोरी की विशेषताओं और इसके महत्व के बारे में।
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एक अनोखी तिजोरी का रहस्य

आज हम आपको एक अनोखी तिजोरी के बारे में बताएंगे, जो नॉर्वे में स्थित है। इसे स्वालबार्ड ग्लोबल सीड वॉल्ट कहा जाता है, और यह एक गुप्त स्थान पर बनी हुई है। इसकी जानकारी केवल कुछ ही लोगों को है। यह आर्कटिक क्षेत्र में सबसे ऊँचाई पर स्थित है और बर्फीले द्वीपसमूह में परमा-फ्रॉस्ट के नीचे छिपी हुई है।


प्रलय के समय के लिए तैयार

आप सोच रहे होंगे कि इस तिजोरी में सोना या हीरा होगा, लेकिन असल में इसमें कृषि के बीजों का भंडार है। इसे एक प्रकार के आपातकालीन भंडार के रूप में बनाया गया है। इसका उद्देश्य यह है कि यदि कभी भी मानवता पर कोई संकट आता है, तो इस तिजोरी में रखे बीजों से फसलों को पुनर्जीवित किया जा सके।


तिजोरी की विशेषताएँ

यह तिजोरी ठोस चट्टान से बनी है और इसमें बीजों को 100 मीटर गहराई पर रखा गया है। इसकी संरचना 40 से 60 मीटर मोटी चट्टानों के बीच है। बीजों को जमा करने के लिए विशेष शर्तें हैं, जिसके तहत इनका उपयोग नहीं किया जा सकता।


स्वालबार्ड ग्लोबल सीड वॉल्ट: भविष्य के लिए कृषि बीजों का सुरक्षित भंडार


स्वालबार्ड ग्लोबल सीड वॉल्ट 26 फरवरी 2008 को खोला गया था। इसमें तीन हॉल हैं, जिनमें से प्रत्येक में 1.5 मिलियन बीजों के नमूने रखने की क्षमता है। वर्तमान में, इसमें लगभग 900,000 बीजों के नमूने रखे गए हैं।


भारत का योगदान

दिलचस्प बात यह है कि भारत इस तिजोरी में बीजों का सबसे बड़ा हिस्सा रखता है, जो कुल 15% है। मेक्सिको 6.1% के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि अमेरिका 3.8% के साथ तीसरे स्थान पर है।