विराट कोहली ने कप्तानी छोड़ने के बाद की मानसिक चुनौतियों का किया खुलासा

भारतीय क्रिकेट के दिग्गज विराट कोहली ने अपनी कप्तानी छोड़ने के बाद की मानसिक चुनौतियों का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि कैसे राहुल द्रविड़ और विक्रम राठौर ने उन्हें कठिन समय में समर्थन दिया। कोहली ने 2023 में शानदार प्रदर्शन किया, जिसमें उन्होंने आठ टेस्ट मैचों में 671 रन बनाए। जानें उनके अनुभव और मानसिक स्वास्थ्य पर उनके विचार।
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कोहली की मानसिक स्थिति और कोचों का योगदान

भारतीय क्रिकेट के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली ने बताया कि जब उन्होंने भारत की कप्तानी छोड़ी, तब वह मानसिक रूप से एक कठिन दौर से गुजर रहे थे। उन्होंने पूर्व मुख्य कोच राहुल द्रविड़ और बल्लेबाजी कोच विक्रम राठौर का आभार व्यक्त किया, जिनकी मदद से उन्होंने फिर से क्रिकेट का आनंद लेना शुरू किया।
कोहली ने 2022 में कप्तानी छोड़ने के बाद टेस्ट क्रिकेट में अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन किया, जिसमें उन्होंने छह टेस्ट मैचों में केवल एक अर्धशतक के साथ 265 रन बनाए, और उनका औसत 26.5 रहा।


द्रविड़ और राठौर का समर्थन

द्रविड़ ने नवंबर 2021 में मुख्य कोच के रूप में कार्यभार संभाला, जबकि राठौर बल्लेबाजी कोच बने। इन दोनों ने कोहली में नई ऊर्जा भरने का काम किया और उन्हें कठिन समय से बाहर निकलने में मदद की।
कोहली ने कहा, "कप्तानी छोड़ने के बाद मैंने राहुल भाई और विक्रम राठौर से खुलकर बात की और अपने अनुभव साझा किए। 2023 में मेरा प्रदर्शन टेस्ट क्रिकेट में शानदार रहा, और मैं हमेशा उनका आभार व्यक्त करता हूं।"


कोहली का प्रदर्शन और मानसिक स्वास्थ्य

कोहली ने 'आरसीबी इनोवेशन लैब' के 'इंडियन स्पोर्ट्स समिट' में कहा, "उन्होंने मेरा इस तरह ख्याल रखा कि मुझे लगा कि मैं उनके लिए खेलना चाहता हूं।" उन्होंने यह भी बताया कि द्रविड़ और राठौर उनकी मानसिक परेशानियों को समझते थे और उन्हें उबरने का रास्ता दिखाया।
कोहली ने 2023 में आठ टेस्ट मैचों में 671 रन बनाए, जिसमें दो शतक और दो अर्धशतक शामिल थे, और उनका औसत 56 रहा।


कप्तानी का बोझ

कोहली ने स्वीकार किया कि कप्तानी के दौरान उन्होंने अपनी ऊर्जा खो दी थी। उन्होंने कहा, "मैं इस स्थिति में पहुंच गया था कि मैं हमारी बल्लेबाजी इकाई और कप्तानी का केंद्र बन गया। मुझे नहीं पता था कि यह कितना भारी होगा।"
उन्होंने कहा, "जब मैंने कप्तानी छोड़ी, तब मैं पूरी तरह थक चुका था। यह जिम्मेदारी मुझे भीतर तक खा गई थी।"