मैकगिल विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने खोजा हड्डियों को मजबूत करने वाला नया आणविक स्विच

मैकगिल विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने एक अद्वितीय आणविक स्विच की खोज की है, जो शरीर में कैलोरी जलाने की प्रणाली को सक्रिय करता है। यह खोज मोटापे और चयापचय के अध्ययन में नई संभावनाएँ प्रस्तुत करती है, और इसके प्रभाव हड्डियों के स्वास्थ्य पर पड़ने की उम्मीद है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह खोज 'सॉफ्ट बोन्स' जैसी दुर्लभ बीमारियों के उपचार में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।
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लखनऊ में ऐतिहासिक खोज

लखनऊ। मैकगिल विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक अद्वितीय आणविक 'स्विच' की खोज की है, जो शरीर में कैलोरी जलाने की एक प्रभावशाली प्रणाली को सक्रिय करता है। यह महत्वपूर्ण खोज मोटापे और चयापचय के अध्ययन में एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है, और इसके तत्काल प्रभाव हड्डियों के स्वास्थ्य पर पड़ने की संभावना है, जिससे 'सॉफ्ट बोन्स' जैसी दुर्लभ बीमारियों के उपचार में क्रांतिकारी बदलाव आ सकता है। यह शोध प्रतिष्ठित जर्नल 'नेचर' में प्रकाशित हुआ है, जो ब्राउन फैट के कार्य करने के तरीके पर नई जानकारी प्रदान करता है।


आणविक स्विच की विशेषताएँ

क्या है यह ‘आणविक स्विच’?


यह खोज 'ग्लिसरॉल' नामक एक अणु पर आधारित है, जो ठंडे तापमान में शरीर की वसा के टूटने पर निकलता है। वैज्ञानिकों ने देखा कि ग्लिसरॉल, TNAP नामक एंजाइम के एक विशिष्ट हिस्से से जुड़कर उसे सक्रिय करता है, जिसे वे 'ग्लिसरॉल पॉकेट' कहते हैं। यह प्रक्रिया शरीर में ऊष्मा उत्पन्न करने वाले एक वैकल्पिक जैविक मार्ग को सक्रिय करती है, जिसे 'फ्यूटाइल क्रिएटिन साइकिल' कहा गया है।


हड्डियों के स्वास्थ्य में सुधार

हड्डियों के इलाज में क्रांति की उम्मीद


शोधकर्ताओं का मानना है कि यह खोज मोटापे के उपचार में सहायक हो सकती है, लेकिन इसका सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव हड्डियों के स्वास्थ्य पर होगा। TNAP एंजाइम पहले से ही हड्डियों के निर्माण और कैल्सीफिकेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। TNAP की गतिविधि में कमी आनुवंशिक उत्परिवर्तन के कारण 'हाइपोफॉस्फेटेसिया' नामक दुर्लभ बीमारी का कारण बनती है, जिसे आमतौर पर 'सॉफ्ट बोन्स' कहा जाता है।


नए उपचार की संभावनाएँ

नए उपचार का मार्ग प्रशस्त


शोध के सहलेखक और मैकगिल विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मार्क मैकी ने कहा, “यह खोज एक नई चिकित्सा के विकास का मार्ग प्रशस्त करती है, जहां प्राकृतिक या कृत्रिम जैवसक्रिय यौगिकों के माध्यम से ग्लिसरॉल पॉकेट के जरिए TNAP एंजाइम की गतिविधि को बढ़ाया जा सकता है। इससे हड्डियों में खनिज की कमी को सामान्य स्तर पर लाने में मदद मिल सकती है, विशेषकर उन रोगियों के लिए जो आनुवंशिक कारणों से कमजोर TNAP एंजाइम से प्रभावित हैं।”