आरबीआई का नया ड्राफ्ट: डिजिटल फ्रॉड से ग्राहकों को मिलेगी राहत

आरबीआई ने डिजिटल फ्रॉड से प्रभावित ग्राहकों को राहत देने के लिए एक नया ड्राफ्ट फ्रेमवर्क पेश किया है। इसमें छोटे मूल्य के धोखाधड़ी मामलों में मुआवजे का प्रावधान है। यदि किसी ग्राहक को 50,000 रुपये तक का नुकसान होता है, तो उसे 25,000 रुपये तक का मुआवजा मिल सकता है। यह मुआवजा जीवन में केवल एक बार मिलेगा। नए नियम 1 जुलाई 2026 से लागू होंगे। आरबीआई ने हितधारकों से सुझाव मांगे हैं। जानें इस प्रस्ताव के बारे में और अधिक जानकारी।
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आरबीआई का नया ड्राफ्ट: डिजिटल फ्रॉड से ग्राहकों को मिलेगी राहत

आरबीआई का प्रस्ताव


भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने डिजिटल धोखाधड़ी से प्रभावित ग्राहकों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किया है। केंद्रीय बैंक ने 'डिजिटल लेनदेन में ग्राहक जिम्मेदारी' पर एक नया ड्राफ्ट फ्रेमवर्क जारी किया है, जिसमें छोटे मूल्य के धोखाधड़ी मामलों में पीड़ितों को मुआवजा देने का प्रावधान है।


मुख्य बिंदु


  • फ्रॉड की सीमा: यदि किसी ग्राहक को डिजिटल बैंकिंग धोखाधड़ी (जैसे UPI, इंटरनेट बैंकिंग, कार्ड लेनदेन) में 50,000 रुपये तक का नुकसान होता है, तो उसे 85% राशि या अधिकतम 25,000 रुपये (जो भी कम हो) तक का मुआवजा मिल सकता है।

  • एक बार की सुविधा: यह मुआवजा किसी व्यक्ति को जीवन में केवल एक बार ही मिलेगा।

  • शर्तें:



    • फ्रॉड की शिकायत 5 दिनों के भीतर बैंक और नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल या हेल्पलाइन 1930 पर दर्ज करानी होगी।

    • ग्राहक की कुछ लापरवाही (जैसे OTP साझा करना) होने पर भी राहत मिल सकती है, लेकिन समय पर रिपोर्टिंग आवश्यक है।



  • मुआवजे का स्रोत: आरबीआई 65% राशि का कवर करेगा, बैंक 20% और शेष अन्य स्रोतों से। यह प्रारंभ में एक वर्ष के लिए है, जिसके बाद समीक्षा की जाएगी।

  • लागू होने की तारीख: नए नियम 1 जुलाई 2026 से प्रभावी होंगे।


आरबीआई का उद्देश्य

आरबीआई के अनुसार, देश में होने वाले लगभग 65% बैंकिंग धोखाधड़ी 50,000 रुपये से कम के होते हैं। इस ड्राफ्ट का उद्देश्य ग्राहकों का विश्वास बढ़ाना और शिकायतों का त्वरित समाधान करना है।


फीडबैक के लिए समय सीमा

चूंकि यह एक ड्राफ्ट है, आरबीआई ने सभी हितधारकों से 6 अप्रैल 2026 तक सुझाव और टिप्पणियां आमंत्रित की हैं। आप आधिकारिक आरबीआई वेबसाइट पर जाकर विवरण देख सकते हैं और फीडबैक भेज सकते हैं।


यह कदम डिजिटल भुगतान के बढ़ते उपयोग के बीच ग्राहक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यदि आपके साथ ऐसा कोई मामला हुआ है, तो तुरंत रिपोर्ट करें!