विवाह में देरी के कारण और समाधान
विवाह में देरी का मुद्दा
बच्चों के विवाह में देरी किसी भी माता-पिता के लिए चिंता का विषय बन जाता है। शादी में देरी के कई कारण हो सकते हैं, जैसे कुंडली में दोष, मांगलिक दोष, ग्रहों की स्थिति या पितृदोष। ये समस्याएं रिश्तों में बाधा डालती हैं, जिससे योग्य वर या कन्या की तलाश में कठिनाई होती है। ज्योतिष के अनुसार, इन समस्याओं का समाधान करना आवश्यक है।
विवाह में देरी के प्रमुख कारण
मांगलिक दोष: यदि किसी की कुंडली में मांगलिक दोष है, तो यह विवाह में देरी का एक प्रमुख कारण बनता है। मांगलिक जातक का विवाह भी मांगलिक जातक से होना चाहिए ताकि इस दोष का प्रभाव कम हो सके।
सप्तमेश का कमजोर होना: यदि सप्तम भाव का स्वामी दुष्ट ग्रहों से प्रभावित है या नीच राशि में है, तो यह विवाह में देरी का कारण बनता है।
बृहस्पति का कमजोर होना: कुंडली में बृहस्पति का कमजोर होना भी विवाह में बाधा डाल सकता है।
शुक्र का कमजोर होना: यदि शुक्र ग्रह कमजोर है, तो यह जीवन में कई कार्यों में रुकावट पैदा कर सकता है।
नवांश कुंडली में दोष: नवांश कुंडली में दोष होने पर भी विवाह में बाधाएं उत्पन्न होती हैं।
विवाह बाधा निवारण के उपाय
बृहस्पति की पूजा से विवाह में आ रही बाधाएं समाप्त हो सकती हैं। गुरुवार का दिन इस पूजा के लिए विशेष महत्व रखता है।
गुरुवार को बृहस्पति देव को पीले रंग की वस्तुएं चढ़ाना चाहिए, जैसे हल्दी, पीले फल, और पीले कपड़े।
यदि किसी लड़की की शादी में देरी हो रही है, तो उसे शुक्रवार को सफेद और गुरुवार को पीले कपड़े पहनने चाहिए।
नहाने के पानी में हल्दी मिलाकर स्नान करने से भी विवाह योग्य लोगों को जल्दी शादी में मदद मिलती है।
लड़कियों को योग्य वर की प्राप्ति के लिए सोलह सोमवार का व्रत करना चाहिए।
किसी रिश्तेदार की शादी में मेहंदी की रस्म में भाग लेना भी शुभ होता है।
