वरदा विनायक चतुर्थी 2026: पूजा विधि और महत्व
वरदा चतुर्थी का महत्व
वरदा चतुर्थी की तिथि: 17 मई 2026 से अधिक मास की शुरुआत हो चुकी है। इस महीने के शुक्ल पक्ष में आने वाली वरदा विनायक चतुर्थी का व्रत 20 मई 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान गणेश की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।
वरदा विनायक चतुर्थी 2026 की तिथि
पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अधिक मास की चतुर्थी तिथि 19 मई 2026 को दोपहर 2:18 बजे शुरू होगी और 20 मई 2026 को सुबह 11:06 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार, यह व्रत 20 मई 2026, बुधवार को मनाया जाएगा।
धार्मिक महत्व
अधिक मास को सनातन धर्म में भगवान विष्णु और भक्ति का विशेष महीना माना जाता है। इस दौरान आने वाली वरदा विनायक चतुर्थी का महत्व और भी बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन गणेश जी की पूजा से बुद्धि, धन, सफलता और संतान सुख की प्राप्ति होती है।
वरदा का अर्थ है वरदान देने वाला, इसलिए इस दिन गणपति भक्तों की इच्छाएं पूरी होती हैं। व्रत रखने और गणेश मंत्रों का जाप करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है। यह दिन नए कार्यों की शुरुआत, करियर, व्यापार और विवाह संबंधी बाधाओं को दूर करने के लिए बेहद शुभ माना जाता है।
वरदा विनायक चतुर्थी की पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
- घर और पूजा स्थल को साफ करें।
- लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर गणेश जी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
- गणेश जी को लाल फूल, दूर्वा, मोदक, केला, गुड़ और चने की दाल का भोग लगाएं।
- घी का दीपक जलाएं और 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का जाप करें।
- गणेश चतुर्थी व्रत कथा का पाठ करें। पूजा के बाद आरती करें और अपनी मनोकामना सच्चे मन से कहें।
पूजा के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें
इस दिन भगवान गणेश को तुलसी के पत्ते अर्पित नहीं करने चाहिए। इसके अलावा तामसिक भोजन का सेवन न करें, किसी के बारे में गलत न सोचें और किसी से वाद-विवाद न करें। घर और मंदिर की साफ-सफाई का ध्यान रखें।
