यमराज की कहानी: मृत्यु के देवता और अमृत का संवाद
इस लेख में यमराज और अमृत की कहानी का वर्णन किया गया है, जिसमें मृत्यु के देवता के संकेत और अमृत की अद्भुत यात्रा को दर्शाया गया है। जानें कैसे यमराज ने अमृत को मृत्यु के संकेत दिए और अमृत ने उन संकेतों को कैसे अनदेखा किया। यह कहानी जीवन और मृत्यु के गहरे अर्थ को उजागर करती है।
| Jan 15, 2026, 03:34 IST
यमराज: मृत्यु के देवता
यम है हम – मौत के देवता
- कुछ नियम ऐसे होते हैं, जिन्हें सभी को मानना पड़ता है, चाहे वह कोई विशेष व्यक्ति हो या आम इंसान। सृष्टि के नियमों का पालन न केवल मनुष्यों को करना होता है, बल्कि देवताओं को भी। यही कारण है कि भगवान राम और भगवान कृष्ण को भी इस धरती पर जन्म लेकर मृत्यु का सामना करना पड़ता है। जीवन में हर व्यक्ति को अपने सपनों और इच्छाओं को पूरा करने का प्रयास करना होता है, लेकिन हम यह भूल जाते हैं कि एक दिन मृत्यु भी हमारे दरवाजे पर दस्तक देगी।
- मृत्यु के देवता, यमराज को दक्षिण के लोकपाल के रूप में जाना जाता है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, यम पहले प्राणी थे जिनकी मृत्यु हुई थी, और इसी कारण भगवान शिव ने उन्हें मृतकों के शासक के रूप में नियुक्त किया।
- मृत्यु के समय, यमदूत आत्मा को स्वर्ग या नरक के द्वार पर ले जाने के लिए आते हैं, जहां यमराज आत्मा के कर्मों का मूल्यांकन करते हैं। अच्छे और बुरे कर्मों के आधार पर दंड दिया जाता है।
- यमलोक में, यमराज इंसान के कर्मों के अनुसार स्वर्ग और नरक का निर्णय लेते हैं। प्राचीन शास्त्रों में कहा गया है कि यमराज ने अपने भक्त अमृत से वादा किया था कि वे हर किसी की मृत्यु से पहले सूचना देंगे, ताकि लोग अपने अधूरे काम पूरे कर सकें।
यमराज और अमृत की कहानी
- एक समय, यमुना के किनारे अमृत नाम का एक व्यक्ति रहता था। वह यमराज की दिन-रात पूजा करता था क्योंकि उसे अपनी मृत्यु का डर सताता था। वह यमराज से दोस्ती करना चाहता था ताकि वह मौत को टाल सके।
- यमराज अमृत की तपस्या से प्रभावित हुए और जब प्रकट हुए, तो अमृत ने अमरता का वरदान मांगा। यमराज ने समझाया कि जो जन्म लेता है, उसे एक दिन मरना भी है। अमृत ने कहा कि अगर मृत्यु को टाला नहीं जा सकता, तो कम से कम मुझे इसकी सूचना दी जाए ताकि मैं अपने परिवार के लिए प्रबंध कर सकूं।
- यमराज ने अमृत को मौत की पूर्व सूचना देने का वादा किया, लेकिन अमृत को भी यह वादा करना पड़ा कि वह जैसे ही मृत्यु का संकेत पाएगा, वह विदाई की तैयारी करेगा। इसके बाद यमराज अदृश्य हो गए। समय बीतने लगा और अमृत ने यमराज के वादे पर भरोसा करते हुए विलासितापूर्ण जीवन जीना शुरू कर दिया।
यमराज के संकेत
- पहला संकेत: बालों का सफेद होना।
- दूसरा संकेत: दांत गिरना।
- तीसरा संकेत: ज्ञानेन्द्रियों का कमजोर पड़ना।
- चौथा संकेत: कमर झुक जाना।
- एक दिन, अमृत ने यमदूतों को अपने पास देखा और परेशान होकर यमराज का पत्र खोजने लगा, लेकिन उसे कुछ नहीं मिला। जब वह यमलोक पहुंचा, तो यमराज ने मुस्कुराते हुए उसका स्वागत किया। अमृत ने यमराज पर धोखा देने का आरोप लगाया।
- यमराज ने विनम्रता से उत्तर दिया कि उन्होंने अमृत को चार संकेत भेजे थे, लेकिन उसकी विलासिता ने उसे अंधा बना दिया था। यमराज ने कहा कि जब उसके बाल सफेद हुए, वह पहला संकेत था। जब उसके दांत टूट गए, वह दूसरा संकेत था। तीसरा संकेत उसकी दृष्टि का खोना और चौथा संकेत उसके शरीर का काम करना बंद करना था। लेकिन अमृत ने इनमें से किसी भी संकेत को नहीं समझा।
