पुरुषोत्तमी एकादशी 2026: उपाय और महत्व
पुरुषोत्तमी एकादशी का महत्व
पुरुषोत्तमी एकादशी 2026: इस वर्ष बुधवार को पुरुषोत्तमी एकादशी का व्रत मनाया जाएगा। यह एकादशी हर तीन साल में एक बार आती है। इसे अधिक मास के दौरान मनाया जाता है, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। इस विशेष एकादशी का पालन करने से व्यक्ति की सभी समस्याएं समाप्त हो जाती हैं और उसे अपार सुख, समृद्धि और धन की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही, यह व्यक्ति को हर प्रकार की सिद्धि प्रदान करती है और आर्थिक कठिनाइयों से मुक्ति दिलाती है। आइए, आचार्य इंदु प्रकाश से जानते हैं कि इस दिन कौन से उपाय किए जाने चाहिए।
उपाय और विधियाँ
व्यापार में वृद्धि: यदि आप अपने व्यवसाय में वृद्धि चाहते हैं, तो पुरुषोत्तमी एकादशी के दिन स्नान के बाद साफ कपड़े पहनकर भगवान विष्णु की पूजा करें। पूजा के दौरान एक रुपये का सिक्का भगवान के पास रखें और उस पर हल्दी का तिलक करें। इस सिक्के को पूजा के बाद अपने पास रख लें।
गलती से छुटकारा: यदि आपको किसी गलती का पछतावा है, तो स्नान के पानी में चार बूंद आंवले का रस मिलाएं और उससे स्नान करें। इस दौरान भगवान विष्णु का ध्यान करें।
कार्य में बाधा: यदि आपके कार्य में रुकावट आ रही है, तो एक सूखा नारियल लें, उसे आधा काटें और उसमें एक रुपये का सिक्का डालें। इसे भगवान विष्णु को अर्पित करें।
खुशहाली के लिए: एक बर्तन में दूध लें और उसमें केसर डालकर भगवान को भोग लगाएं। 10 मिनट बाद उस दूध को परिवार के सदस्यों को प्रसाद के रूप में दें।
आर्थिक तंगी से मुक्ति: पीली सरसों के दाने लेकर भगवान विष्णु के सामने रखें और नारायण मंत्र का जाप करें।
परिवार में शांति: सवा किलो चने की दाल लें और उसे जरूरतमंद को दान करें।
दांपत्य जीवन में सुधार: दो बांसुरी के जोड़े लेकर भगवान के मंदिर में जाएं और एक को घर ले आएं।
समृद्धि के लिए: एक ब्राह्मण को भोजन कराएं और उनका आशीर्वाद लें।
अन्न की कमी से बचने के लिए: सात पीली कौड़ियां और हल्दी की गांठें लेकर मंदिर में पूजा करें।
बच्चों की तरक्की: बच्चों के हाथों से भगवान को पीली मिठाई का भोग लगवाएं।
काम की सफलता: गीता का पाठ करें या उसकी एक प्रति घर में रखें।
विश पूरी करने के लिए: भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें और केले का नैवेद्य अर्पित करें।
आचार्य इंदु प्रकाश का परिचय
(आचार्य इंदु प्रकाश एक प्रसिद्ध ज्योतिषी हैं, जिनका वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र और ज्योतिष में गहरा अनुभव है। उन्हें हर सुबह 7.30 बजे भविष्यवाणी में देखा जा सकता है।)
