परमा एकादशी: विशेष व्रत का महत्व और पूजा विधि

परमा एकादशी, जो तीन साल में एक बार आती है, हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत है। इस व्रत का पालन करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और पापों से मुक्ति मिलती है। जानें इस विशेष दिन की तिथि, पूजा विधि और इसके धार्मिक महत्व के बारे में।
 | 
परमा एकादशी: विशेष व्रत का महत्व और पूजा विधि gyanhigyan

परमा एकादशी कब आती है?

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, यह व्रत भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने, मोक्ष पाने और पापों से मुक्ति के लिए सर्वोत्तम है। हर साल 24 एकादशी आती हैं, लेकिन जब हिंदू पंचांग में 'अधिकमास' जुड़ता है, तो यह संख्या बढ़कर 26 हो जाती है।


परमा एकादशी व्रत का विशेष महत्व

ज्योतिष और धार्मिक विद्वानों के अनुसार, अधिकमास के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को परमा एकादशी कहा जाता है। यह व्रत तीन साल में केवल एक बार आता है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है।


परमा एकादशी की तिथि और शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, इस वर्ष अधिकमास की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 11 जून 2026 को सुबह 12:57 बजे शुरू होगी और रात 10:36 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के अनुसार, इस दिन परमा एकादशी का पर्व मनाया जाएगा।


परमा एकादशी की पूजा विधि

सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा को स्थापित करें। उन्हें पीले फूल, ऋतु फल, धूप, दीप और पंचामृत अर्पित करें। भगवान को पीले रंग की मिठाई का भोग लगाएं और तुलसी दल अवश्य रखें। इस दिन भगवान की आरती करें और रात्रि जागरण करें। अगले दिन किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन और दान दें।


परमा एकादशी का धार्मिक महत्व

सनातन धर्म में व्रत का विशेष महत्व है। 'परमा' का अर्थ है सर्वोत्तम। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधिपूर्वक व्रत रखने से मनुष्य को सोने का दान और अश्वमेध यज्ञ के समान फल मिलता है। भगवान कृष्ण ने अर्जुन को बताया था कि जो व्यक्ति इस दिन श्रद्धा से पूजा करता है, उसे मृत्यु के बाद बैकुंठ धाम में स्थान मिलता है।