आचार्य चाणक्य की नीतियों में महिलाओं की बुरी आदतें
महिलाओं की आदतें और आचार्य चाणक्य की दृष्टि
कहा जाता है कि किसी व्यक्ति का मूल स्वभाव उसके बचपन से ही निर्धारित हो जाता है। जैसे-जैसे व्यक्ति बड़ा होता है, उसके क्रोध, चंचलता, शरारत, मजाकिया स्वभाव, बुद्धिमत्ता, मूर्खता, ईमानदारी और बेईमानी का अंदाजा उसके बचपन से लगाया जा सकता है। इसी तरह, पत्नियों की कुछ आदतें भी उनके बचपन में ही बन जाती हैं। इनमें से कई बुरी आदतें उनके स्वभाव का हिस्सा बन जाती हैं, जिन्हें बाद में माता-पिता या पति भी नहीं बदल सकते।
आचार्य चाणक्य ने अपनी नीतियों में कुछ ऐसी आदतों का उल्लेख किया है जो महिलाओं में हमेशा एक जैसी रहती हैं। ये आदतें जीवनभर नहीं बदलती हैं। आइए जानते हैं कि ये कौन-कौन सी बुरी आदतें हैं।
1. झूठ बोलकर स्वार्थ साधना
आचार्य चाणक्य के अनुसार, महिलाएं झूठ बोलने में कुशल होती हैं। यह स्वभाव बचपन से ही उनके साथ होता है। वे अपनी आवश्यकताओं के अनुसार झूठ बोलती हैं, कभी खुद को बचाने के लिए और कभी अपने काम निकलवाने के लिए। हालांकि, ये झूठ कभी-कभी किसी के भले के लिए भी होते हैं, लेकिन कई बार यह निजी स्वार्थ के लिए भी होता है।
2. बिना सोचे समझे साहस दिखाना
चाणक्य के अनुसार, महिलाएं साहसी होती हैं, लेकिन कई बार उनकी यह बहादुरी उन्हें मुश्किल में डाल देती है। वे अपने साहस को दिखाने से पहले उसके परिणाम का आकलन नहीं करतीं, जिससे कई बार वे खतरे में पड़ जाती हैं। इसलिए, बिना सोचे-समझे साहस दिखाने वाली महिलाओं से सावधान रहना चाहिए।
3. स्वार्थ को प्राथमिकता देना
चाणक्य नीति के अनुसार, महिलाएं अपने स्वार्थ को हमेशा पहले रखती हैं। वे दूसरों की अपेक्षाओं के अनुसार कम चलती हैं और अपने फायदे के लिए किसी का भी इस्तेमाल कर सकती हैं। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि सभी महिलाएं ऐसी नहीं होतीं।
4. तर्कहीन कार्य करना
चाणक्य नीति के अनुसार, महिलाएं कई बार ऐसे कार्य कर देती हैं जिनका कोई तर्क नहीं होता। इसके बाद वे पछताती हैं। ये महिलाएं दूसरों की बातों में आकर खुद का निर्णय नहीं ले पातीं और दूसरों की नकल कर लेती हैं।
5. धन का लालच
आचार्य चाणक्य के अनुसार, हर महिला धन की लालच में होती है। उन्हें हमेशा अधिक से अधिक पैसा चाहिए होता है। कभी-कभी, इस धन की चाह में वे गलत रास्ते पर भी चल पड़ती हैं और दूसरों को नुकसान पहुंचा देती हैं।