अधिक मास में वरदा चतुर्थी पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

अधिक मास में वरदा चतुर्थी का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और मंत्रों की जानकारी प्राप्त करें। जानें कैसे करें पूजा और क्या है इसके लाभ।
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अधिक मास में वरदा चतुर्थी पूजा विधि और शुभ मुहूर्त gyanhigyan

अधिक मास और वरदा चतुर्थी का महत्व

अधिक मास में हर तिथि का विशेष महत्व होता है। शास्त्रों के अनुसार, इस मास की हर तिथि को पुण्यदायी माना गया है। विशेष रूप से, अधिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का पूजा में महत्वपूर्ण स्थान है। मुद्गलपुराण में इसे वरदा चतुर्थी के रूप में वर्णित किया गया है। सामान्य मासों में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा की जाती है, उसी प्रकार अधिक मास की चतुर्थी पर भी गणेश पूजन का विधान है। इस समय किए गए गणेश पूजन का फल कई गुना अधिक होता है।


वरदा विनायक चतुर्थी पूजा विधि

विनायक चतुर्थी के दिन प्रात: स्नान करके साफ कपड़े पहनें। पूजा स्थान को साफ करके गंगाजल छिड़कें। एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। गणपति जी को वस्त्र, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य आदि के साथ षोडशोपचार से पूजा करें। लाल पुष्प और सिंदूर अर्पित करें। विशेष रूप से दूर्वा, शुद्ध घी, मोदक और लड्डू का नैवेद्य अर्पित करें। दिनभर व्रत रखने के बाद शाम को अधिक मास शुक्ल चतुर्थी की कथा का पाठ करें या सुनें। अंत में गणेश जी की आरती और मंत्रों का जाप करें। अगले दिन पंचमी तिथि को व्रत का पारण करें और ब्राह्मण को दान दें।


वरदा चतुर्थी शुभ मुहूर्त

चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 19 मई, 2026 को 02:18 PM।


चतुर्थी तिथि समाप्त: 20 मई, 2026 को 11:06 AM।


चतुर्थी मध्याह्न मुहूर्त: 10:56 AM से 11:06 AM।


वर्जित चंद्र दर्शन का समय: 08:43 AM से 11:08 PM।


गणेश जी पूजा मंत्र

1. श्री वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येशु सर्वदा॥


2. ॐ श्रीं गं सौभाग्य गणपतये। वर्वर्द सर्वजन्म में वषमान्य नमः॥


3. ॐ एकदन्ताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दन्ति प्रचोदयात्॥


4. ॐ गं गणपतये नमः॥


5. ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा॥