अधिक मास में दान के महत्व और नियम
अधिक मास का महत्व
अधिक मास, जिसे मलमास और पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, भगवान विष्णु का प्रिय महीना माना जाता है। यह माह 17 मई से शुरू होकर 15 जून 2026 तक चलेगा। इस वर्ष ज्येष्ठ का महीना 30 दिनों का नहीं, बल्कि 60 दिनों का होगा, इसलिए इसे 'ज्येष्ठ अधिक मास' कहा जाएगा। हर तीन साल में अधिक मास आता है, जिससे एक अतिरिक्त महीना जुड़ जाता है।
दान का महत्व
अधिक मास में दान और पुण्य का विशेष महत्व है। शास्त्रों के अनुसार, इस माह में दान करने से अक्षय फल प्राप्त होते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मलमास में दान करने से न केवल पापों का नाश होता है, बल्कि रुके हुए कार्य भी संपन्न होते हैं और आर्थिक उन्नति के द्वार खुलते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस माह में कुछ विशेष चीजों का दान करना अत्यंत लाभकारी होता है।
जल और अन्न का दान
अधिक मास में जल और अन्न का दान पुण्यकारी माना जाता है। गर्मी के इस मौसम में प्यासों को पानी पिलाना एक महान कार्य है। जल दान के साथ प्याऊ लगवाना या पानी से भरा मटका दान करना भी अत्यंत लाभकारी है। राहगीरों के लिए पानी की व्यवस्था करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
मालपुआ का दान
इस माह में मालपुआ का दान भी लाभकारी माना जाता है। मालपुआ का दान करने से घर में सुख और समृद्धि आती है। विशेष रूप से, कांसे के पात्र में 33 मालपुए रखकर दान करने से पितृ दोष दूर होता है और व्यक्ति को धन और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
धार्मिक पुस्तकों का दान
अधिक मास के इस पावन महीने में श्रीमद्भागवत गीता या विष्णु सहस्रनाम जैसी धार्मिक पुस्तकों का दान करना चाहिए। इससे मान-सम्मान में वृद्धि होती है और ज्ञान तथा मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।
पीले वस्त्रों का दान
भगवान विष्णु को समर्पित इस माह में किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को पीले वस्त्र दान करने से करियर और व्यापार में आ रही बाधाएं दूर होती हैं। इससे कुंडली में 'गुरु' ग्रह मजबूत होता है।
दीपदान का महत्व
अधिक मास में दीपदान का विशेष महत्व है। इस माह में किसी मंदिर, पवित्र नदी के किनारे या तुलसी के पास शाम के समय घी का दीपक जलाने से घर की नकारात्मकता समाप्त होती है और लक्ष्मी जी का स्थायी वास होता है।
