वैशाख अमावस्या 2026: जानें क्या करें और क्या न करें

वैशाख अमावस्या 2026 का दिन पितरों की पूजा और आत्मिक शुद्धि के लिए महत्वपूर्ण है। इस दिन स्नान और दान से पुण्य की प्राप्ति होती है। लेकिन इस बार पंचक का प्रभाव भी रहेगा, जिससे कुछ कार्यों से बचना आवश्यक है। जानें इस दिन क्या करना चाहिए और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
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वैशाख अमावस्या का महत्व

अमावस्या का दिन पितरों की पूजा और आत्मिक शुद्धि के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन स्नान और दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। इस बार वैशाख अमावस्या पर पंचक का प्रभाव रहेगा, जिससे इसका महत्व और बढ़ गया है। ज्योतिष के अनुसार, इस दिन कुछ गलतियों से जीवन में परेशानियाँ और बाधाएँ उत्पन्न हो सकती हैं।


अमावस्या की तिथि

वैशाख अमावस्या 17 अप्रैल 2026 को है। पंचक की अवधि 13 अप्रैल 2026 की सुबह से शुरू होकर 17 अप्रैल की दोपहर 12:02 बजे समाप्त होगी। इस दौरान स्नान, दान और पितृ कर्म पंचक के प्रभाव में होंगे।


इन कामों से बचें

1. शुभ कार्यों की शुरुआत: अमावस्या और पंचक के दौरान किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत नहीं करनी चाहिए, जैसे गृहप्रवेश, शादी, मुंडन आदि।


2. दक्षिण दिशा की यात्रा: पंचक के दौरान दक्षिण दिशा की यात्रा से बचें।


3. लकड़ी का सामान न खरीदें: पंचक में ज्वलनशील सामान जैसे लकड़ी और ईंधन न खरीदें।


4. शैय्या-पलंग न लें: पंचक में बिस्तर या पलंग खरीदना अशुभ माना जाता है।


5. घर की छत डलवाना: घर के निर्माण या छत डालने का कार्य पंचक में न करें।


6. सुनसान जगह न जाएं: अमावस्या की रात नकारात्मक शक्तियाँ सक्रिय रहती हैं, इसलिए सुनसान स्थानों से दूर रहें।


7. बुजुर्गों का अपमान: अमावस्या के दिन बुजुर्गों का अपमान करना भारी पड़ सकता है।


अमावस्या के दिन करें ये उपाय

पितरों के लिए तर्पण और दान करें।


पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं।


बाधाओं से बचने के लिए गंगाजल का छिड़काव करें।