होली के रंगों का प्रशिक्षण: जनक दीदी का प्रयास

डॉ. जनक पलटा मगिलिगन ने इंदौर में होली के प्राकृतिक रंगों पर एक सप्ताह का प्रशिक्षण आयोजित किया। इस कार्यक्रम में विभिन्न संस्थानों के छात्रों ने भाग लिया और प्राकृतिक रंग बनाने की विधियों को सीखा। मुख्य अतिथि डॉ. प्रतीक श्रीवास्तव ने जनक दीदी के कार्यों की सराहना की और छात्रों को पर्यावरण के प्रति जागरूक रहने की प्रेरणा दी। यह प्रशिक्षण न केवल होली के रंगों को प्राकृतिक बनाने पर केंद्रित था, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम था।
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होली के रंगों का प्रशिक्षण: जनक दीदी का प्रयास

प्राकृतिक रंगों का उत्सव


सनावदिया (इंदौर), 27 फरवरी 2026 पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. जनक पलटा मगिलिगन द्वारा संचालित जिम्मी मगिलिगन सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट में होली के प्राकृतिक रंगों पर एक सप्ताह का प्रशिक्षण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।


कार्यक्रम के समापन पर गुजराती आर्ट्स ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की, इसके बाद ला कॉलेज एवं जनक दीदी द्वारा बहाई प्रार्थना का आयोजन किया गया। अरुणाभ ऑटिज्म स्कूल के एक छात्र ने प्रह्लाद-होलिका की पौराणिक कथा सुनाकर सभी का मन मोह लिया।


जनक दीदी ने मुख्य अतिथि, डिजियाना न्यूज़ इंदौर के संपादक-इन-चीफ एवं गुजराती कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. प्रतीक श्रीवास्तव, उनके छात्रों और अरुणाभ संस्था के विशेष छात्रों का स्वागत किया।


उन्होंने कहा, "मेरा जीवन ईश्वर द्वारा दिए मानव जन्म को समर्पित है। हमें सभी प्राणियों का संरक्षण करना चाहिए। त्योहारों का आनंद लेते समय प्रकृति का सम्मान करना आवश्यक है। इसलिए पिछले 15 वर्षों से मैं होली से पहले प्राकृतिक रंगों का प्रशिक्षण देती आ रही हूं, ताकि सभी स्वस्थ और आनंदित होली खेल सकें।"


इस प्रशिक्षण में देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के सोशल साइंसेज एवं पत्रकारिता विभाग, अक्रोपोलिस रोटरेक्ट, प्रेस्टीज इंस्टीट्यूट, गुजराती लॉ एंड आर्ट्स कॉलेज, आईएटीवी स्कूल, अरुणाभ के ऑटिज्म छात्रों और सनावदिया के विभिन्न आयु वर्ग के लोगों ने भाग लिया।


प्रशिक्षण में टेसू के फूलों से नारंगी, पोई से काला रंग, बोगनविलिया, संतरे और मौसमी के छिलकों से संतरी रंग, परिजात के केसर-सिंदूर से तिलक, पलाश, बोगनविलिया और चुकंदर से गीले-सूखे रंग बनाने का प्रदर्शन किया गया। दीदी ने बताया कि ये रंग आसानी से उपलब्ध सामग्रियों से बनते हैं, जो स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए सुरक्षित हैं, जबकि रासायनिक रंग त्वचा और कपड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं और पानी-मिट्टी को प्रदूषित करते हैं।


मुख्य अतिथि डॉ. प्रतीक श्रीवास्तव ने कहा, "पद्मश्री जनक दीदी, जिन्होंने आदिवासी महिलाओं और गांव को जीवन समर्पित किया, हम सबके लिए प्रेरणा स्रोत हैं। मैं 1985 से उनसे जुड़ा हूं और उनकी प्रकृति के प्रति समर्पण से प्रभावित हूं। आज यहां उपस्थित छात्रों से अपील है कि वे मोबाइल की आभासी दुनिया से दूर रहकर पर्यावरण के प्रति समर्पित जीवन जिएं। हम संकल्प लेते हैं कि इस होली प्राकृतिक रंगों से ही खेलेंगे और सस्टेनेबल लाइफस्टाइल अपनाएंगे।"


यह प्रशिक्षण पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ, जो जनक दीदी के जीवन दर्शन को दर्शाता है।