हिमाचल में बेमौसमी बारिश से फसलों को भारी नुकसान

हिमाचल प्रदेश में हालिया बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि ने फसलों को गंभीर नुकसान पहुँचाया है। कृषि विभाग के आकलन के अनुसार, 1,226.75 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ है, जिससे लगभग 1.49 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। मंडी, ऊना, शिमला और सिरमौर जिलों में गेहूं, जौ, दलहनों और सब्जियों पर सबसे अधिक असर पड़ा है। यदि मौसम की स्थिति इसी तरह बनी रही, तो उत्पादन में 50 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है। जानें इस स्थिति का किसानों पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
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हिमाचल में बेमौसमी बारिश से फसलों को भारी नुकसान

फसलों पर बेमौसमी बारिश का असर

हिमाचल में बेमौसमी बारिश से फसलों को भारी नुकसान

शिमला। हाल ही में आंधी, ओलावृष्टि और बेमौसमी वर्षा के कारण हिमाचल प्रदेश में 1,226.75 हेक्टेयर फसलें प्रभावित हुई हैं। इस प्राकृतिक आपदा से लगभग 1.49 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, जैसा कि कृषि विभाग द्वारा किए गए आकलन में सामने आया है। विभाग ने इस रिपोर्ट को सरकार को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजा है। रिपोर्ट के अनुसार मंडी, ऊना, शिमला और सिरमौर जिलों में गेहूं, जौ, दलहनों और सब्जियों पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ा है। गेहूं की फसल सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है, जिसमें लगभग 981 हेक्टेयर फसल खराब हुई है, जिससे 62.85 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।

इसके अतिरिक्त, दलहनों जैसे चना और मसूर में भी 166 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ है। कृषि विभाग ने प्रभावित किसानों को राहत प्रदान करने के लिए आवश्यक कदम उठाने की सिफारिश की है। यदि मौसम की स्थिति इसी तरह बनी रही, तो उत्पादन में 50 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है। सब्जियों के 74.75 हेक्टेयर क्षेत्र में भी नुकसान हुआ है, जिससे 26.92 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। इससे किसानों की आय और रबी फसलों के उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। मंडी जिला सबसे अधिक प्रभावित हुआ है, जहां 66.99 लाख रुपये का नुकसान हुआ है, जिससे किसानों और बागवानों की चिंता बढ़ गई है।

डॉ. रविंद्र जसरोटिया ने बताया कि मंडी में 17566.99 लाख रुपये, ऊना में 88146.00 लाख रुपये, शिमला में 40.7518.64 लाख रुपये और सिरमौर में 13017.44 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। आंधी, ओलावृष्टि और बेमौसमी वर्षा के कारण फसलों पर गंभीर असर पड़ा है। यदि यह बारिश और ओलावृष्टि का सिलसिला जारी रहा, तो नुकसान और बढ़ सकता है।

प्रदेश के कई हिस्सों में रुक-रुक कर बारिश हो रही है, जबकि दर्रों में हल्का हिमपात भी हुआ है। लाहुल-पांगी मुख्य मार्ग भूस्खलन के कारण बंद हो गया है, जिससे पांगी का लाहुल से संपर्क कट गया है। सियूंर में रावी नदी पर बने लकड़ी के पुल पर निर्भरता बढ़ गई है। यह पुल तीन दशक से अधिक पुराना है, जहां से छोटे वाहन और लोग गुजरते हैं।

हालांकि, इस पुल की भार क्षमता सीमित है, इसलिए खाली वाहन ही यहां से गुजर सकते हैं। सामान और सवारियों को पुल के एक तरफ उतारना पड़ता है। यह पुल कई बार भूस्खलन के कारण क्षतिग्रस्त हो चुका है। एक बार तो भूस्खलन के कारण पुल पूरी तरह से टूट गया था।

भरमौर के लोक निर्माण विभाग के अधिशाषी अभियंता वीसी ठाकुर ने बताया कि सियूंर के पास रावी पर निर्माणाधीन पुल पहाड़ी दरकने के कारण भूस्खलन की चपेट में आ गया है। पुल का 90 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका था और इस माह के अंत तक पुल चालू होने की उम्मीद थी।