हाफिज सईद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी, पहलगाम आतंकी हमले में मुख्य भूमिका का आरोप
जम्मू की अदालत ने लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है, जो 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले में मुख्य आरोपी हैं। एनआईए ने अदालत में कहा कि सईद जानबूझकर गिरफ्तारी से बच रहा है और उसकी अनुपस्थिति में मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी है। यह मामला भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत चलाया जा सकता है।
| Jul 14, 2026, 13:37 IST
जम्मू की अदालत का महत्वपूर्ण निर्णय
2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले से संबंधित एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, जम्मू की एक अदालत ने लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के प्रमुख हाफिज सईद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। यह आदेश नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) द्वारा 6 जुलाई को प्रस्तुत की गई एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट के बाद आया है, जिसमें सईद को आरोपी ठहराया गया है। आरोप है कि वह 22 अप्रैल, 2025 को हुए हमले का मास्टरमाइंड था, जिसमें 26 लोग मारे गए, जिनमें अधिकांश पर्यटक थे। एनआईए ने अदालत से अनुरोध किया कि सईद जानबूझकर गिरफ्तारी से बच रहा है और उसके खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए वारंट जारी किया जाए।
एनआईए का तर्क और सईद की अनुपस्थिति
एनआईए ने अपने आवेदन में कहा कि सईद वर्तमान में पाकिस्तान में है और उसकी उपस्थिति भारतीय अदालत में सुनिश्चित करना संभव नहीं है। एजेंसी ने अदालत को बताया कि उसे पाकिस्तान से वापस लाने के सभी कानूनी प्रयास लगभग समाप्त हो चुके हैं, इसलिए न्यायिक प्रक्रिया उसकी अनुपस्थिति में भी जारी रहनी चाहिए। एनआईए के अनुसार, पहलगाम हमले की साजिश पाकिस्तान में बनाई गई थी और सईद ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
मुकदमे की प्रक्रिया
इस प्रकार के मुकदमे की शुरुआत के लिए अदालत को समन और वारंट जारी करना आवश्यक होता है। यदि आरोपी फिर भी अदालत में पेश नहीं होता है, तो उसे घोषित अपराधी माना जा सकता है, जिसके बाद उसकी अनुपस्थिति में कार्यवाही जारी रह सकती है। एनआईए की पहली चार्जशीट में तीन पाकिस्तानी आतंकवादियों के साथ-साथ लश्कर-ए-तैयबा के एक ऑपरेटिव और दो स्थानीय आरोपियों को भी शामिल किया गया था।
