हरियाणा में रॉबर्ट वाद्रा के खिलाफ धनशोधन मामले में ईडी की बड़ी कार्रवाई

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हरियाणा के गुरुग्राम में रॉबर्ट वाद्रा के खिलाफ धनशोधन मामले में एक महत्वपूर्ण स्थिति रिपोर्ट अदालत में पेश की है। इस मामले में डीएलएफ की भूमिका की जांच भी जारी है। विशेष न्यायाधीश ने मामले की अगली सुनवाई 21 अगस्त को तय की है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और वाद्रा के खिलाफ चल रही जांच के बारे में।
 | 
gyanhigyan

ईडी की कार्रवाई और रॉबर्ट वाद्रा का मामला

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हरियाणा के गुरुग्राम जिले के शिकोहपुर (अब सेक्टर 83) में संपत्ति सौदे से संबंधित धनशोधन के मामले में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। एजेंसी ने कारोबारी रॉबर्ट वाद्रा और अन्य आरोपियों के खिलाफ शुक्रवार को एक सीलबंद लिफाफे में अपनी स्थिति रिपोर्ट अदालत में पेश की है। यह जांच मुख्य रूप से वाद्रा के खिलाफ चल रही है, जो कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाद्रा के पति हैं।


विशेष न्यायाधीश सुशांत चांगोत्रा को ईडी ने बताया कि इस मामले में मैसर्स डीएलएफ की भूमिका की जांच अभी भी जारी है। न्यायाधीश ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि ईडी ने सीलबंद लिफाफे में स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत की है, जिसमें डीएलएफ की भूमिका की जांच का जिक्र है। इसके साथ ही, अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 21 अगस्त की तारीख निर्धारित की है।


सुनवाई के दौरान, मामले के एक अन्य आरोपी केवल सिंह विर्क ने अपनी जमानत और जमानती बॉण्ड अदालत में पेश किए, जिन्हें अदालत ने स्वीकार कर लिया। इससे पहले, रॉबर्ट वाद्रा ने मई में दिल्ली उच्च न्यायालय में दायर अपनी याचिका को बिना किसी शर्त के वापस ले लिया था, जिसमें उन्होंने विशेष सीबीआई अदालत द्वारा खुद को समन किए जाने के आदेश को चुनौती दी थी।


यह ध्यान देने योग्य है कि अदालत ने 15 अप्रैल को वाद्रा के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दायर आरोप पत्र पर संज्ञान लिया था। यह पहली बार है जब किसी जांच एजेंसी ने 57 वर्षीय वाद्रा के खिलाफ किसी आपराधिक मामले में चार्जशीट पेश की है। इससे पहले अप्रैल 2025 में, ईडी ने इस मामले में वाद्रा से लगातार तीन दिनों तक पूछताछ की थी।


विशेष न्यायाधीश चांगोत्रा ने पहले कहा था कि आरोप पत्र और संबंधित दस्तावेजों की प्रारंभिक जांच से यह स्पष्ट होता है कि वाद्रा और आठ अन्य आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं। उन्होंने धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 3 (धन शोधन) और धारा 70 (कंपनियों द्वारा किए गए अपराध) के तहत दर्ज अपराधों का संज्ञान लिया है, जो इस कानून की धारा 4 के तहत दंडनीय हैं।