हरिद्वार में कुंभ मेला: गैर हिंदुओं के प्रवेश पर प्रस्तावित प्रतिबंध पर बहस

हरिद्वार में प्रस्तावित कुंभ मेला के दौरान गैर हिंदुओं के प्रवेश पर चर्चा तेज हो गई है। उत्तराखंड सरकार हरिद्वार-ऋषिकेश क्षेत्र को पवित्र नगरी घोषित करने पर विचार कर रही है, जिससे धार्मिक, राजनीतिक और सामाजिक बहस छिड़ गई है। क्या यह प्रतिबंध स्थायी होगा? जानें इस मुद्दे के सभी पहलुओं के बारे में और जानें कि विपक्ष इस प्रस्ताव का कैसे विरोध कर रहा है।
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हरिद्वार में कुंभ मेला: गैर हिंदुओं के प्रवेश पर प्रस्तावित प्रतिबंध पर बहस

हरिद्वार में कुंभ मेला और प्रस्तावित धार्मिक परिवर्तन

हरिद्वार
उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार अगले साल जनवरी में होने वाले कुंभ मेले से पहले हरिद्वार-ऋषिकेश नगर निगम क्षेत्र को एक पवित्र धार्मिक नगरी घोषित करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। इस कदम ने धार्मिक, राजनीतिक और सामाजिक चर्चाओं को जन्म दिया है। यह सवाल उठ रहा है कि क्या गैर हिंदुओं का हरिद्वार में आना पूरी तरह से प्रतिबंधित होगा या यह केवल कुंभ और कुछ विशेष धार्मिक स्थलों तक सीमित रहेगा। आइए इसे विस्तार से समझते हैं।

प्रस्ताव का उद्देश्य और पृष्ठभूमि
सूत्रों के अनुसार, हर की पैड़ी और कुछ विशेष घाटों पर गैर हिंदुओं के प्रवेश पर जो मौजूदा प्रतिबंध है, उसे हरिद्वार के सभी 105 गंगा घाटों और पूरे कुंभ क्षेत्र तक बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। इसमें हरिद्वार के साथ ऋषिकेश को भी शामिल किया जा सकता है। सरकार का तर्क है कि कुंभ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन के दौरान क्षेत्र की पवित्रता और सुरक्षा बनाए रखना प्राथमिकता है। साधु-संत और अखाड़ा परिषद लंबे समय से हरिद्वार को विधिवत पवित्र धर्म नगरी का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं।

सूत्रों का कहना है कि यह प्रस्ताव अभी विचाराधीन है और इस पर संतों, अखाड़ा परिषद और हरिद्वार में धार्मिक अनुष्ठानों का संचालन करने वाली प्रमुख संस्था श्री गंगा सभा से चर्चा की जा रही है। संतों की मांग केवल घाटों तक सीमित नहीं है, बल्कि गैर हिंदुओं के रात में ठहरने पर भी प्रतिबंध लगाने की बात उठाई जा रही है, ताकि धार्मिक आयोजनों के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था या धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पहल के पीछे की मंशा स्पष्ट करते हुए कहा कि हरिद्वार मां गंगा, ऋषि-मुनियों और संत परंपरा की पवित्र भूमि है। वहां से लगातार मांग उठ रही है कि उसकी पवित्रता और धार्मिक पहचान बनी रहे। सरकार सभी पहलुओं, पुराने कानूनों, धार्मिक मान्यताओं और व्यावहारिक चुनौतियों का अध्ययन कर रही है और उसी के आधार पर आगे कदम उठाएगी।

क्या गैर हिंदुओं पर हमेशा के लिए रोक लगेगी?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या गैर हिंदुओं पर यहां हमेशा के लिए रोक लग जाएगी? अभी तक जो जानकारी सामने आई है, उसके अनुसार पूरे शहर में स्थायी और पूर्ण प्रतिबंध का कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। चर्चा मुख्य रूप से कुंभ क्षेत्र और गंगा घाटों तक प्रतिबंध बढ़ाने को लेकर है। चूंकि प्रस्ताव विचाराधीन है, इसमें बदलाव, सीमाएं और शर्तें तय की जा सकती हैं।

दूसरे शब्दों में, यह जरूरी नहीं है कि गैर हिंदुओं का हरिद्वार आना पूरी तरह से प्रतिबंधित हो जाए, बल्कि धार्मिक आयोजनों और पवित्र स्थलों की सीमा में नियम सख्त किए जा सकते हैं। हालांकि, अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं है।

विपक्ष का विरोध और गंगा-जमुनी तहजीब की दलील
कांग्रेस ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है। कांग्रेस की राष्ट्रीय मीडिया पैनलिस्ट सुजाता पॉल का कहना है कि यह कदम गंगा-जमुनी तहजीब को नुकसान पहुंचाने वाला और चुनावी ध्रुवीकरण की राजनीति का हिस्सा है। उनके अनुसार, कुंभ मेले में हिंदू श्रद्धालुओं की भीड़ होती है, लेकिन भारतीय परंपरा में विभिन्न समुदायों का सहयोग और सहभागिता हमेशा रही है, जैसा कि अयोध्या जैसे धार्मिक स्थलों पर भी देखा जाता है।

वहीं, महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी और हिंदूवादी नेता नितिन गौतम जैसे नेताओं का कहना है कि कुंभ क्षेत्र को गैर हिंदू प्रतिबंधित घोषित करना सुरक्षा और धार्मिक गरिमा के लिहाज से आवश्यक है। उनका तर्क है कि कुंभ जैसे महाआयोजन में किसी भी प्रकार की साजिश या अव्यवस्था की आशंका को खत्म करने के लिए यह कदम उठाया जाना चाहिए.