हरसिंगार के अद्भुत लाभ और उपयोग
हरसिंगार का परिचय
हारसिंगार का पेड़ आकार में बहुत बड़ा नहीं होता। इसके गोल बीज होते हैं और इसके फूल बेहद नाजुक और सुगंधित होते हैं। जब पेड़ को हिलाया जाता है, तो ये फूल गिर जाते हैं। इनकी खुशबू हवा में दूर से आती है, जिससे मन प्रसन्न हो जाता है।
पारिजात वृक्ष की विशेषताएँ
संस्कृत में इसे पारिजात कहा जाता है, जबकि बंगाली में इसे शिउली कहा जाता है। इस पेड़ पर छोटे सफेद फूल खिलते हैं, जिनकी डंडी नारंगी रंग की होती है। ये फूल रात में खिलते हैं और सुबह गिर जाते हैं। हारसिंगार का तापमान ठंडा और सूखा होता है, लेकिन कुछ किस्में गर्म भी होती हैं।
रूड़की के कुंवर हरिसिंह के अनुसार, भारत में पारिजात वृक्ष की प्रजाति नहीं पाई जाती, लेकिन उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जनपद में एकमात्र पारिजात वृक्ष मौजूद है। यह वृक्ष लगभग 50 फीट ऊँचा है और इसकी शाखाएँ भूमि की ओर झुकती हैं। यह साल में केवल एक बार जून में फूलता है और इसकी आयु 1000 से 5000 वर्ष तक हो सकती है।
हरसिंगार के 15 अद्भुत लाभ
गठिया: हारसिंगार के पांच पत्तों को पीसकर चटनी बनाएं और गर्म पानी में उबालें। इसे ठंडा करके पीने से पुराना गठिया ठीक हो सकता है।
घुटनों की चिकनाई: 10-12 पत्तों को उबालकर पानी पीने से घुटनों की चिकनाई वापस आ सकती है।
साइटिका: हारसिंगार के पत्तों का काढ़ा साइटिका में लाभकारी होता है।
बालों का झड़ना: हारसिंगार के बीज को पीसकर गंजे स्थान पर लगाने से नए बाल उगने लगते हैं।
बुखार: हारसिंगार के पत्तों का रस बुखार को ठीक करने में मदद करता है।
बवासीर: पारिजात का बीज बवासीर के लिए रामबाण औषधि है।
यकृत: हारसिंगार के पत्तों का रस यकृत की वृद्धि को ठीक करता है।
हृदय रोग: इसके फूल हृदय के लिए लाभकारी होते हैं।
दाद: हारसिंगार की पत्तियों का लेप दाद को ठीक करता है।
सूखी खाँसी: पत्तियों को शहद में मिलाकर सेवन करने से सूखी खाँसी ठीक होती है।
त्वचा रोग: पत्तियों का लेप त्वचा संबंधी रोगों में उपयोगी होता है।
दमा: हारसिंगार की छाल का चूर्ण श्वास रोग में लाभकारी होता है।
क्रोनिक बुखार: पारिजात की कोंपल का सेवन स्त्री रोग में लाभ देता है।
खुजली: पत्तों का लेप खुजली में राहत देता है।
ध्यान देने योग्य बातें
हारसिंगार खांसी में हानिकारक हो सकता है। इसके दोषों को दूर करने के लिए कुटकी का उपयोग किया जाता है।
