हनुमान जी की प्रसन्नता का रहस्य: तुलसी की माला का महत्व

हनुमान जी की प्रसन्नता का रहस्य जानें, जब माता सीता ने उन्हें तुलसी का पत्ता दिया। यह पौराणिक कथा बताती है कि कैसे हनुमान जी की भूख भक्ति की होती है। जानें इस अद्भुत कथा के पीछे का महत्व और तुलसी की माला का स्थान।
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हनुमान जी की प्रसन्नता का रहस्य: तुलसी की माला का महत्व

हनुमान जी की पौराणिक कथा

हनुमान जी की प्रसन्नता का रहस्य: तुलसी की माला का महत्व

हनुमान जीImage Credit source: AI-ChatGpt

हनुमान जी की कथा: हिंदू धर्म में बजरंगबली को संकटमोचन के रूप में पूजा जाता है। भक्त उन्हें सिंदूर, चमेली का तेल और बूंदी के लड्डू अर्पित करते हैं। लेकिन इनमें सबसे महत्वपूर्ण तुलसी के पत्ते या तुलसी की माला होती है। मान्यता है कि जब हनुमान जी को तुलसी की माला पहनाई जाती है, तो वे भक्त के सभी संकटों को दूर कर देते हैं। आइए जानते हैं इसके पीछे की पौराणिक कथा।

जब हनुमान जी की भूख नहीं हुई शांत

कथा के अनुसार, जब भगवान राम वनवास के बाद अयोध्या के राजा बने, तब माता सीता ने हनुमान जी के लिए अपने हाथों से भोजन तैयार किया। उन्होंने हनुमान जी के लिए कई प्रकार के व्यंजन और छप्पन भोग सजाए। हनुमान जी ने बड़े चाव से खाना शुरू किया, लेकिन उनकी भूख शांत नहीं हुई। माता सीता ने फिर से भोजन बनवाया, लेकिन हनुमान जी ने उसे भी खा लिया। भंडार खाली होने लगा, फिर भी उनकी तृप्ति नहीं हुई।

माता सीता का उपाय

माता सीता इस स्थिति में चिंतित हो गईं कि हनुमान जी की भूख कैसे शांत की जाए। तब उन्होंने भगवान श्री राम का स्मरण किया। प्रभु श्री राम ने मुस्कुराते हुए माता सीता को एक उपाय बताया। माता सीता ने समझा कि हनुमान जी की भूख शारीरिक नहीं, बल्कि भक्ति की भूख है। उन्होंने एक तुलसी का पत्ता लिया और उस पर राम नाम लिखा। जब हनुमान जी ने वह पत्ता ग्रहण किया, तो उनका पेट तुरंत भर गया और वे संतुष्ट हो गए। तुलसी में राम का वास होने के कारण, जब राम नाम हनुमान जी तक पहुंचता है, तो वे पूरी तरह संतुष्ट हो जाते हैं।

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