स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ नई FIR: POCSO एक्ट और अन्य धाराएं शामिल

स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हुई मारपीट के मामले में नई FIR दर्ज की गई है। FIR में POCSO एक्ट, BNS और IT एक्ट की धाराएं शामिल हैं। हालांकि, ये धाराएं जमानती हैं, जिससे गिरफ्तारी की कोई तत्काल आवश्यकता नहीं है। इस मामले में नाबालिग से जुड़ी शिकायत के आधार पर कार्रवाई की जा रही है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बारे में।
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स्वतंत्र भारद्वाज की मुश्किलें बढ़ीं


जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान हुई मारपीट के मामले में स्वतंत्र भारद्वाज की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ एक नई FIR दर्ज की है, जिसमें POCSO एक्ट, भारतीय न्याय संहिता (BNS) और IT एक्ट की कुल पांच धाराएं शामिल हैं। यह FIR एक नाबालिग से संबंधित शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है। हालांकि, इन धाराओं में जमानत का प्रावधान है, इसलिए गिरफ्तारी की कोई तत्काल आवश्यकता नहीं है।


नई FIR में शामिल धाराएं

रिपोर्टों के अनुसार, स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ दर्ज FIR में BNS की धाराएं 78, 79 और 351 के साथ-साथ POCSO एक्ट की धारा 12 और IT एक्ट की धारा 67 भी शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि शिकायत में पीछा करने, महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने, आपराधिक धमकी और ऑनलाइन गतिविधियों से जुड़े आरोपों की जांच की जा रही है।


यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि FIR में धाराओं का लगना केवल आरोपों की जांच की शुरुआत है, दोष सिद्ध होना नहीं। पुलिस को शिकायत और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की जांच करनी होगी, और आगे की कानूनी प्रक्रिया उसी के आधार पर तय होगी।


POCSO एक्ट की धारा 12 का महत्व

नई FIR में POCSO एक्ट की धारा 12 का उल्लेख किया गया है, जो बच्चों के खिलाफ यौन उत्पीड़न से संबंधित मामलों में लागू होती है। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने नाबालिग से जुड़ी शिकायत के आधार पर यह मामला दर्ज किया है।


नाबालिग की पहचान और उससे जुड़ी संवेदनशील जानकारी को सार्वजनिक करना कानून और बाल सुरक्षा के दृष्टिकोण से उचित नहीं है। इसलिए इस मामले में सामने आए आरोपों के संबंध में केवल वही जानकारी साझा की जा रही है जो सार्वजनिक रिपोर्टों में उपलब्ध है।


जमानती धाराओं का अर्थ

पुलिस की FIR में शामिल सभी धाराएं जमानती बताई गई हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि आरोप समाप्त हो गए हैं या व्यक्ति को मामले से क्लीन चिट मिल गई है। इसका अर्थ केवल यह है कि इन धाराओं में तत्काल गिरफ्तारी अनिवार्य नहीं है और जमानत का कानूनी विकल्प उपलब्ध है।


इसलिए, नई FIR के बावजूद इस मामले में तत्काल गिरफ्तारी की कोई बाध्यता नहीं है। आगे की पुलिस जांच, उपलब्ध साक्ष्य और अदालत की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।


पहले गिरफ्तारी का मामला

स्वतंत्र भारद्वाज को पहले जंतर-मंतर पर एक नाबालिग छात्रा के पिता के साथ कथित मारपीट के मामले में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने पहले दर्ज FIR में SC/ST एक्ट की धाराएं भी जोड़ी थीं। उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां उन्हें एक दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया।


यह मामला 23 जून 2026 को जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन से संबंधित है। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान एक व्यक्ति के साथ मारपीट की शिकायत आई थी। बाद में इस घटना से संबंधित एक वायरल वीडियो भी चर्चा में आया, जिसके आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की।


नाबालिग की शिकायत पर नई FIR

रिपोर्टों के अनुसार, नाबालिग की ओर से ऑनलाइन धमकी और उत्पीड़न से संबंधित शिकायत पुलिस के सामने आई थी, जिसमें स्वतंत्र भारद्वाज का नाम भी शामिल था। इसके बाद पुलिस ने अलग से FIR दर्ज की। जांच में सोशल मीडिया गतिविधियों और डिजिटल रिकॉर्ड की भी पड़ताल की जाएगी।


पुलिस के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों के पीछे वास्तविक तथ्य क्या हैं और ऑनलाइन गतिविधियों में किन लोगों की भूमिका रही है। रिपोर्टों के अनुसार FIR में स्वतंत्र भारद्वाज के साथ कुछ अज्ञात सोशल मीडिया यूजर्स का भी उल्लेख किया गया है।


SC/ST एक्ट का मामला

जंतर-मंतर की घटना से संबंधित मूल मामले में शुरुआत में BNS की कुछ धाराओं के तहत FIR दर्ज हुई थी। बाद में पुलिस ने मामले में SC/ST एक्ट की धाराएं भी जोड़ीं। इसी दौरान नाबालिग से जुड़ी अलग शिकायत सामने आने के बाद POCSO के तहत नई FIR दर्ज की गई।


इस प्रकार स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ अब दो अलग कानूनी कार्रवाई के पहलू सामने हैं—एक जंतर-मंतर पर कथित मारपीट से जुड़ा मामला और दूसरा नाबालिग से संबंधित नई FIR।


आगे की प्रक्रिया

अब दिल्ली पुलिस नई FIR में लगाए गए आरोपों की जांच करेगी। इसमें शिकायत से जुड़े तथ्यों, सोशल मीडिया गतिविधियों और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी। इसके बाद पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई तय कर सकती है।


यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि FIR में आरोप दर्ज होना और अदालत से दोष सिद्ध होना दो अलग बातें हैं। स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ दर्ज आरोपों का अंतिम फैसला जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।


निष्कर्ष

स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ POCSO समेत पांच धाराओं में नई FIR दर्ज होने से मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। हालांकि नई FIR में लगी धाराएं जमानती हैं, इसलिए केवल इस FIR के आधार पर तत्काल गिरफ्तारी की कानूनी बाध्यता नहीं है। वहीं, पुराने जंतर-मंतर मारपीट मामले में उनकी गिरफ्तारी और पुलिस रिमांड की कार्रवाई अलग है। अब पुलिस की जांच और अदालत की आगे की प्रक्रिया पर सभी की नजर रहेगी।