स्टेप मदर्स डे: सौतेली माताओं के प्रति सम्मान का दिन
स्टेप मदर्स डे का महत्व
नई दिल्ली। हाल ही में, 11 मई को विश्वभर में मदर्स डे मनाया गया, जो सभी माताओं के प्रति समर्पित है। इसके बाद, 18 मई को 'स्टेप मदर्स डे' मनाने की परंपरा है, जो उन सौतेली माताओं के लिए समर्पित है, जो अपने बच्चों को जन्म नहीं देतीं, लेकिन उन्हें अपने दिल से अपनाती हैं। यह विशेष दिन अमेरिका में मनाया जाता है।
सौतेली माताओं के लिए बच्चों का विश्वास जीतना और उनकी मां जैसी भूमिका निभाना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। फिर भी, वे प्रयास करती हैं कि बच्चे कभी भी अपनी मां की कमी महसूस न करें। हालांकि वे मां की जगह नहीं ले सकतीं, लेकिन वे मां के समान प्यार और सहारा देने का प्रयास करती हैं। हर साल मदर्स डे के बाद आने वाले रविवार को स्टेप मदर्स डे मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य सौतेली माताओं को वह प्यार और सम्मान प्रदान करना है, जिसके वे हकदार हैं। यह दिन परिवार में उनके महत्व को दर्शाता है।
सौतेली माताओं का सफर आसान नहीं होता। जब वे नए परिवार में शामिल होती हैं, तो उन्हें बहुत कुछ समझना और अपनाना पड़ता है। बच्चों की दिनचर्या में ढलना और उन्हें प्यार और सहारा देना आवश्यक होता है। इसके साथ ही, उन्हें पूरे घर का ध्यान भी रखना होता है।
स्टेप मदर्स डे की शुरुआत लगभग 20 साल पहले हुई थी। यह विचार एक 9 वर्षीय बच्ची, लिजी कैपुजी, द्वारा प्रस्तुत किया गया था, जो अपनी सौतेली मां जॉयस से बहुत प्यार करती थी। लिजी का मानना था कि सौतेली माताओं के लिए भी एक विशेष दिन होना चाहिए। उसने अपने विचार को एक पत्र के माध्यम से सीनेटर रिक सेंटोरम को भेजा, जिन्होंने इसे गंभीरता से लिया। 2000 में, इस विचार को आधिकारिक रूप से अमेरिका की संसद के दस्तावेज में शामिल किया गया।
