स्क्रीन टाइम का मस्तिष्क स्वास्थ्य पर प्रभाव

आज की डिजिटल दुनिया में, स्क्रीन टाइम का बढ़ता उपयोग हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि निरंतर बैकग्राउंड स्टिमुलेशन से मस्तिष्क की कार्यप्रणाली में बदलाव आ रहा है, जिससे मानसिक थकान और ध्यान की कमी जैसी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। सही नींद लेना और स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करना आवश्यक है। जानें इस विषय में और अधिक जानकारी और विशेषज्ञों की सलाह।
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स्क्रीन टाइम और मानसिक स्वास्थ्य

स्क्रीन टाइम का मस्तिष्क स्वास्थ्य पर प्रभाव


आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग शायद ही कभी सच में आराम से बैठ पाते हैं। पहले लोग लंबी यात्रा के दौरान खिड़की से बाहर देखते थे, या लाइन में खड़े रहते हुए अपने चारों ओर की चीजों का आनंद लेते थे। लेकिन अब हर खाली समय में किसी न किसी स्क्रीन का सहारा लिया जाता है। मोबाइल नोटिफिकेशन, छोटी वीडियो, पॉडकास्ट और लगातार आने वाले संदेशों ने हमारे दिमाग को आराम करने का मौका नहीं दिया है।


क्या इसका हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है?


न्यूरोलॉजिस्ट्स का मानना है कि यह निरंतर बैकग्राउंड स्टिमुलेशन हमारे दिमाग के कार्य करने के तरीके को बदल रहा है। बाहरी रूप से कोई व्यक्ति आराम करता हुआ दिख सकता है, लेकिन वास्तव में उसका दिमाग लगातार सक्रिय रहता है। यही कारण है कि लोग बिना किसी शारीरिक मेहनत के भी मानसिक थकान महसूस करते हैं।


क्या हमारा मस्तिष्क हमेशा सक्रिय रहने के लिए बना है?


होसमैट हॉस्पिटल्स के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. प्रभु के अनुसार, इंसानी मस्तिष्क को इस तरह लगातार सक्रिय रहने के लिए नहीं बनाया गया था। पहले दिन में छोटे-छोटे पल होते थे जब दिमाग खुद को शांत कर लेता था। लेकिन अब हर खाली जगह डिजिटल चीजों से भर गई है। डॉ. प्रभु का कहना है कि स्मार्टफोन, सोशल मीडिया और लगातार आने वाले नोटिफिकेशन हमारे दिमाग को हमेशा सक्रिय रखते हैं।


हमेशा सक्रिय रहने का क्या असर होता है?


विशेषज्ञों का कहना है कि यह थकान तुरंत महसूस नहीं होती। लोग सोचते हैं कि मोबाइल स्क्रॉल करना या देर रात तक वीडियो देखना आरामदायक है, लेकिन असल में दिमाग लगातार नई जानकारी को प्रोसेस करता रहता है। यही कारण है कि नर्वस सिस्टम हमेशा हल्की सतर्कता में रहता है। धीरे-धीरे यह आदत मानसिक थकान, ध्यान की कमी और इमोशनल बर्नआउट का कारण बन सकती है। नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ की रिसर्च में भी यह पाया गया है कि अधिक स्क्रीन टाइम और देर रात तक डिजिटल चीजों में लगे रहने से नींद की गुणवत्ता, इमोशनल संतुलन और ध्यान लगाने की क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।


क्यों सही नींद जरूरी है?


अरेटे हॉस्पिटल्स के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. सुरेश बाबू पी बताते हैं कि मस्तिष्क में एक विशेष सफाई प्रणाली होती है, जिसे ग्लिम्फैटिक सिस्टम कहा जाता है। यह प्रणाली गहरी नींद के दौरान सबसे अधिक सक्रिय होती है और दिनभर में जमा होने वाले जहरीले मेटाबॉलिक पदार्थों को बाहर निकालने का कार्य करती है। डॉ. सुरेश बाबू पी के अनुसार, यदि नींद की कमी या रात में अधिक स्क्रीन का उपयोग होता है, तो लंबे समय में मस्तिष्क की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कम से कम 6 से 8 घंटे की uninterrupted नींद लेने और रात में स्क्रीन टाइम को कम करने की सलाह दी है।