सोमनाथ मंदिर: भारतीय संस्कृति का प्रतीक और पीएम मोदी की प्रशंसा
सोमनाथ का महत्व
सोमनाथ... इस नाम से ही हमारे मन में गर्व की भावना जागृत होती है। यह भारत की आत्मा की एक अमिट पहचान है। यह भव्य मंदिर गुजरात के पश्चिमी तट पर स्थित प्रभास पाटन में है। द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र में भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों का उल्लेख किया गया है, जिसमें सोमनाथ का नाम पहले स्थान पर आता है, जो इसकी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्ता को दर्शाता है।
पीएम मोदी की सराहना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सोमनाथ मंदिर की प्रशंसा की, जिसे बार-बार विदेशी आक्रमणों के बाद पुनर्निर्मित किया गया था। उन्होंने इसे भारतीय सभ्यता की अदम्य भावना का प्रतीक बताया। पीएम मोदी ने एक ब्लॉग में कहा कि सोमनाथ का उदाहरण हमारी संस्कृति की अडिगता को दर्शाता है, जो कठिनाइयों का सामना करते हुए भी गर्व से खड़ा है।
हमलों के बावजूद सोमनाथ की महत्ता
पीएम मोदी ने कहा, "सोमनाथ की कहानी भारत माता के अनगिनत साहसी बच्चों की है, जिन्होंने हमारी संस्कृति की रक्षा की।" उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने सदियों के आक्रमणों के बावजूद वैश्विक विकास के एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरने की क्षमता दिखाई है।
उन्होंने कहा, "हमारी कला, संस्कृति, और त्योहार अब वैश्विक स्तर पर पहचान बना रहे हैं। योग और आयुर्वेद दुनिया भर में लोकप्रिय हो रहे हैं।"
इतिहास में सोमनाथ का स्थान
सोमनाथ मंदिर पर कई बार हमले हुए, जिसमें 1024 ईस्वी में महमूद गजनवी का हमला भी शामिल है। पीएम मोदी ने बताया कि आज़ादी के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल ने मंदिर के पुनर्निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने कहा, "1947 में दिवाली के समय की यात्रा ने पटेल को इतना प्रभावित किया कि उन्होंने मंदिर के पुनर्निर्माण की घोषणा की। 11 मई 1951 को सोमनाथ में एक भव्य मंदिर भक्तों के लिए खोला गया।"
सोमनाथ का ऐतिहासिक सफर
1299 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति अलाफ खान ने मंदिर को नष्ट किया। इसके बाद हिंदू शासकों ने इसे पुनर्निर्मित किया। 1669 ईस्वी में औरंगजेब ने इसे गिराने का आदेश दिया। रानी अहिल्याबाई होल्कर ने 1783 में पास में एक नया मंदिर बनवाया, जिससे इसकी पवित्रता को बनाए रखा जा सके।
