सोने की बढ़ती मांग और गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम का महत्व

सरकार ने सोने की बढ़ती मांग और करंट अकाउंट डेफिसिट को नियंत्रित करने के लिए गोल्ड इंपोर्ट ड्यूटी को बढ़ाकर 15% कर दिया है। इस स्थिति में, गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम एक महत्वपूर्ण विकल्प बनकर उभरी है। इस योजना के तहत, लोग अपने सोने को बैंक में जमा कर ब्याज प्राप्त कर सकते हैं। जानें इस स्कीम की प्रक्रिया, शर्तें और वर्तमान में उपलब्ध विकल्पों के बारे में।
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सोने की बढ़ती मांग और गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम का महत्व gyanhigyan

गोल्ड इंपोर्ट ड्यूटी में वृद्धि

सोने की बढ़ती मांग और देश के करंट अकाउंट डेफिसिट को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने गोल्ड इंपोर्ट ड्यूटी को बढ़ाकर 15% कर दिया है। इसमें 10% बेसिक कस्टम ड्यूटी और 5% एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस शामिल हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से एक साल तक सोने की खरीदारी टालने की सलाह दी थी। इस स्थिति में, यह सवाल उठता है कि सोने में निवेश का वैकल्पिक तरीका क्या हो सकता है? इसी संदर्भ में गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम फिर से चर्चा में आई है.


गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम की जानकारी

गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम के तहत, भारतीय नागरिक अपने घर या बैंक लॉकर में रखे सोने जैसे ज्वेलरी, गोल्ड कॉइन या बार को बैंक में निर्धारित समय के लिए जमा कर सकते हैं। इसके बदले में बैंक उस सोने पर ब्याज प्रदान करता है। मैच्योरिटी के समय, ग्राहक सोने की मौजूदा कीमत के अनुसार पैसा ले सकते हैं या फिर फिजिकल गोल्ड वापस प्राप्त कर सकते हैं। इस योजना का उद्देश्य घरों, संस्थानों और मंदिरों में पड़े निष्क्रिय सोने का उपयोग करना और देश की गोल्ड इंपोर्ट पर निर्भरता को कम करना है.


महत्वपूर्ण बातें

इस स्कीम की एक प्रमुख शर्त यह है कि जमा की गई ज्वेलरी वापस नहीं मिलती। बैंक ज्वेलरी को पिघलाकर गोल्ड बार में बदल देता है। यदि ज्वेलरी में स्टोन या नग लगे हैं, तो उन्हें पहले निकालकर वापस कर दिया जाता है। इसके अलावा, सोने की शुद्धता की जांच के दौरान यदि उसमें मिलावट पाई जाती है, तो जमा होने वाले सोने की मात्रा कम हो सकती है.


प्रक्रिया का कार्यान्वयन

इस प्रक्रिया की शुरुआत किसी अधिकृत बैंक में KYC पूरा करके जीरो बैलेंस गोल्ड डिपॉजिट अकाउंट खोलने से होती है। इसके बाद, बैंक की सूची में शामिल Collection and Purity Testing Centre पर सोना जमा किया जाता है। वहां सोने की जांच की जाती है और 995 फाइननेस के अनुसार मूल्य निर्धारित किया जाता है। बैंक लगभग 30 दिनों के भीतर खाते में सोने की वैल्यू क्रेडिट करता है और डिपॉजिट सर्टिफिकेट जारी करता है.


वर्तमान में उपलब्ध स्कीम

सरकार ने मार्च 2025 से GMS की मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म स्कीम को बंद कर दिया है। वर्तमान में केवल Short Term Bank Deposit स्कीम उपलब्ध है, जिसकी अवधि 1 से 3 साल है.


सोना जमा करने से पहले ध्यान देने योग्य बातें

सोना जमा करने से पहले ब्याज भुगतान के तरीके को समझना आवश्यक है। कुछ बैंक हर साल ब्याज देते हैं, जबकि कुछ केवल मैच्योरिटी पर। इसके अलावा, समय से पहले पैसा निकालने की सुविधा और मैच्योरिटी पर भुगतान सोने में होगा या कैश में, यह भी पहले स्पष्ट कर लेना चाहिए.