सोने की बढ़ती कीमतों के बीच पुराने गहनों का एक्सचेंज बढ़ा

भारत में सोने की कीमतों में लगातार वृद्धि ने ग्राहकों को अपने पुराने गहनों का एक्सचेंज कर नई ज्वेलरी खरीदने के लिए प्रेरित किया है। ज्वेलरी व्यापारियों के अनुसार, इस प्रक्रिया में सालाना आधार पर 60% की वृद्धि हुई है। प्रमुख ज्वेलरी चेन जैसे Joyalukkas और Kalyan Jewellers ने भी इस ट्रेंड को अपनाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रवृत्ति सोने की कीमतों और आयात शुल्क में वृद्धि के कारण और मजबूत हो रही है।
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सोने की बढ़ती कीमतों के बीच पुराने गहनों का एक्सचेंज बढ़ा gyanhigyan

सोने की कीमतों में वृद्धि का असर

देश में सोने की कीमतों में लगातार वृद्धि ने ग्राहकों की खरीदारी की आदतों में बदलाव ला दिया है। अब लोग नए गहनों को खरीदने के लिए कैश खर्च करने के बजाय अपने पुराने गहनों को एक्सचेंज करना पसंद कर रहे हैं। ज्वेलरी व्यापारियों के अनुसार, पुराने सोने के बदले नई ज्वेलरी खरीदने की प्रक्रिया में सालाना आधार पर लगभग 60% की वृद्धि हुई है। सोने की ऊंची कीमतें, आयात शुल्क और आर्थिक अनिश्चितता इस प्रवृत्ति को तेजी से बढ़ावा दे रही हैं.


ज्वेलरी रिटेल चेन की बिक्री में बदलाव

एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रमुख ज्वेलरी रिटेल चेन Joyalukkas के चेयरमैन जॉय अलुक्कास ने बताया कि कंपनी की कुल बिक्री में गोल्ड एक्सचेंज प्रोग्राम का हिस्सा अब 65% तक पहुंच गया है, जो पहले 40-45% था। उन्होंने कहा कि कुछ दिनों में कंपनी के 70% तक का कारोबार पुराने गहनों के एक्सचेंज से आता है। इसी तरह, Kalyan Jewellers के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर रमेश कल्याणरमन ने बताया कि उनकी कंपनी में एक्सचेंज आधारित बिक्री का हिस्सा 30% से बढ़कर 40-45% हो गया है.


महंगे सोने और इंपोर्ट ड्यूटी का प्रभाव

उद्योग के विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार द्वारा सोने पर प्रभावी आयात शुल्क बढ़ाने और सोने की कीमतों में तेज वृद्धि के कारण यह प्रवृत्ति और मजबूत हुई है। हाल ही में 24 कैरेट सोने की कीमत लगभग 1.56 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच गई, जबकि एक साल पहले यह लगभग 1 लाख रुपये थी। ऐसे में पुराने गहनों की वैल्यू का उपयोग कर नई ज्वेलरी खरीदना ग्राहकों के लिए अधिक सुविधाजनक और लागत-कुशल विकल्प बन गया है.


घरों में रखे सोने का महत्व

भारत दुनिया के सबसे बड़े सोने के उपभोक्ताओं में से एक है। अनुमान है कि भारतीय परिवारों के पास लगभग 25,000 टन सोना उपलब्ध है। India Bullion and Jewellers Association (IBJA) के राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र मेहता का कहना है कि गोल्ड एक्सचेंज प्रोग्राम घरों में पड़े सोने को फिर से बाजार में लाने में मदद कर रहे हैं। इससे नए सोने के आयात पर निर्भरता कम हो सकती है, क्योंकि भारत हर साल लगभग 900 से 1,000 टन सोना आयात करता है.


Tanishq का गोल्ड एक्सचेंज प्रोग्राम

देश के प्रमुख ज्वेलरी ब्रांड Tanishq भी गोल्ड एक्सचेंज को बढ़ावा दे रहा है। Titan Jewellery Division के CEO अरुण नारायण के अनुसार, पिछले आठ महीनों में लगभग 4.4 लाख ग्राहकों ने 10 टन सोने का एक्सचेंज किया है। मार्केट विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सोने की कीमतें उच्च स्तर पर बनी रहती हैं, तो आने वाले महीनों में गोल्ड एक्सचेंज का ट्रेंड और तेज हो सकता है, जिससे ज्वेलरी व्यवसाय का स्वरूप भी बदल सकता है.