सोनम वांगचुक की अपील: खुद बनें अपने जीवन के नायक

सोनम वांगचुक ने जंतर-मंतर पर चल रहे धरने में नागरिकों से अपील की है कि वे अपने जीवन के नायक स्वयं बनें। उन्होंने कहा कि वे न तो गांधी हैं और न ही कोई नायक, बल्कि एक सामान्य नागरिक हैं। वांगचुक ने छात्रों की आत्महत्या की घटनाओं का जिक्र करते हुए लोगों से मूकदर्शक न बने रहने की अपील की। उन्होंने 20 जुलाई को संसद तक होने वाले शांतिपूर्ण मार्च में भाग लेने का आह्वान किया है। जानें इस आंदोलन की पूरी जानकारी और वांगचुक के विचार।
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सोनम वांगचुक की महत्वपूर्ण अपील

नई दिल्ली में परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ जंतर-मंतर पर चल रहे धरने के दौरान, प्रसिद्ध शिक्षाविद् और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने नागरिकों से एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे किसी और के नेतृत्व का इंतजार न करें और अपने जीवन के 'नायक' स्वयं बनें। वांगचुक ने स्पष्ट किया कि वह न तो 'आधुनिक गांधी' हैं और न ही कोई नायक, बल्कि एक साधारण नागरिक हैं जो अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे हैं।


जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (कॉजपा) के बैनर तले चल रहा यह प्रदर्शन अब 22वें दिन में प्रवेश कर चुका है। इस आंदोलन के समर्थन में सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का यह 14वां दिन है। संगठन द्वारा साझा की गई स्वास्थ्य जानकारी के अनुसार, भूख हड़ताल के कारण उनका वजन 7.5 किलोग्राम कम हो चुका है और रक्तचाप 106/74 एमएम एचजी दर्ज किया गया है।


सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर साझा किए गए एक वीडियो में, वांगचुक ने आंदोलन को मिल रहे समर्थन के लिए लोगों का धन्यवाद किया, लेकिन साथ ही कुछ टिप्पणियों पर अपनी निराशा भी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कई लोग उन्हें 21वीं सदी का गांधी मानते हैं, लेकिन वह केवल एक सामान्य नागरिक हैं जो अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से कहा कि वे किसी और में नायक खोजने के बजाय अपनी नागरिक जिम्मेदारियों को स्वयं उठाएं।


परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं के कारण छात्रों की आत्महत्या की घटनाओं का उल्लेख करते हुए, वांगचुक ने लोगों से मूकदर्शक न बने रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि पीड़ित छात्र किसी की बहन या बेटी होते, तो लोग अवश्य जुड़ते। इसलिए, उन्होंने लोगों से आंदोलन का हिस्सा बनने का आग्रह किया। जो लोग दिल्ली नहीं आ सकते, वे अपने स्थान से अनशन कर सोशल मीडिया पर अपने विचार साझा करें।


वांगचुक ने 20 जुलाई को संसद तक होने वाले शांतिपूर्ण मार्च में बड़ी संख्या में भाग लेने का आह्वान किया है, ताकि सांसदों का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित किया जा सके। उन्होंने कहा कि लोगों को उनकी तरह 24 दिन भूखे रहने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि उन्हें भोजन करके आना चाहिए और एक नागरिक के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए मार्च में शामिल होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें प्रदर्शन स्थल से हटाने की कोई भी कोशिश उनके शांतिपूर्ण विरोध के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन होगा।


इस आंदोलन के माध्यम से कॉजपा ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा अनियमितताओं के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग की है। संसद के मानसून सत्र के पहले दिन, यानी 20 जुलाई को, संगठन ने संसद तक शांतिपूर्ण मार्च का आयोजन किया है। यह प्रदर्शन 20 जून को शुरू हुआ था और वांगचुक 28 जून से इस अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।