सेबी ने राजेश एक्सपोर्ट्स पर लगाया अंतरिम प्रतिबंध, 15 लाख करोड़ की हेराफेरी का खुलासा

भारतीय शेयर बाजार के नियामक सेबी ने ज्वेलरी कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड के प्रमोटर्स पर अंतरिम प्रतिबंध लगाया है। कंपनी पर आरोप है कि उसने वित्त वर्ष 2021 से 2025 के बीच 15.15 लाख करोड़ रुपये के राजस्व को गलत तरीके से दर्शाया। जांच में विदेशी सहायक कंपनियों के कारोबार में गड़बड़ियों का पता चला है। सेबी ने कंपनी द्वारा आवश्यक डेटा उपलब्ध न कराने पर भी सवाल उठाए हैं। यह मामला वित्तीय पारदर्शिता और रिपोर्टिंग की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।
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सेबी ने राजेश एक्सपोर्ट्स पर लगाया अंतरिम प्रतिबंध, 15 लाख करोड़ की हेराफेरी का खुलासा gyanhigyan

सेबी की कार्रवाई का विवरण

भारतीय शेयर बाजार के नियामक ने ज्वेलरी कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड के खिलाफ कठोर कदम उठाते हुए उसके चेयरमैन राजेश मेहता और अन्य प्रमोटर्स पर अंतरिम प्रतिबंध लगा दिया है। 109 पन्नों के आदेश में सेबी ने आरोप लगाया है कि कंपनी ने वित्त वर्ष 2021 से 2025 के बीच लगभग 15.15 लाख करोड़ रुपये के राजस्व को गलत तरीके से दर्शाया। जांच में विदेशी सहायक कंपनियों के कारोबार, बिक्री आंकड़ों और वित्तीय खुलासों में अनियमितताएं सामने आई हैं.


राजस्व में गड़बड़ी का खुलासा

सेबी के अनुसार, वित्त वर्ष 2021 से 2025 के दौरान कंपनी के कुल रिपोर्टेड राजस्व का लगभग 99.8 प्रतिशत हिस्सा गलत तरीके से दिखाया गया हो सकता है, जो कि 15.15 लाख करोड़ रुपये के बराबर है। यह जांच मार्च 2024 में एक शेयरधारक की शिकायत के बाद शुरू हुई थी, जिसमें कंपनी की बैलेंस शीट में बड़े ट्रेड रिसीवेबल्स और संभावित वित्तीय गड़बड़ियों का उल्लेख किया गया था.


विदेशी सहायक कंपनियों की भूमिका

सेबी के आदेश में कहा गया है कि राजेश एक्सपोर्ट्स ने दावा किया था कि उसके समेकित राजस्व का 97 से 99 प्रतिशत हिस्सा विदेशी सहायक कंपनियों से आता है। इनमें स्विट्जरलैंड स्थित वैलकैम्बी एसए को समूह की प्रमुख परिचालन इकाई बताया गया था। हालांकि, जांच में पाया गया कि वैलकैम्बी का स्वतंत्र राजस्व समूह के समेकित राजस्व का 0.5 प्रतिशत से भी कम था.


जानकारी देने में असफलता

सेबी ने यह भी आरोप लगाया कि कंपनी ने जांच के दौरान बिक्री, खरीद, देनदार, लेनदार और इन्वेंट्री से संबंधित डेटा उपलब्ध नहीं कराया। कंपनी ने इसके पीछे स्विस डेटा प्रोटेक्शन कानूनों का हवाला दिया, लेकिन सेबी ने इसे खारिज कर दिया। नियामक ने स्पष्ट किया कि भारतीय बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों को पारदर्शिता के नियमों का पालन करना अनिवार्य है.


विपरीत आंकड़ों की पहचान

जांच के दौरान कंपनी द्वारा प्रस्तुत ग्राहक-वार बिक्री आंकड़ों में भी कई विसंगतियां पाई गईं। कुछ ग्राहक एक रिकॉर्ड में मौजूद थे जबकि अन्य में नहीं। इसके अलावा, एक ही ग्राहक के लिए विभिन्न फाइलिंग में बिक्री के आंकड़े भी भिन्न पाए गए। सेबी का मानना है कि ये विसंगतियां वित्तीय रिपोर्टिंग की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न उठाती हैं.