सूर्य की सक्रियता से अंतरिक्ष मलबे की समस्या में कमी
अंतरिक्ष मलबे की चिंता और ISRO का नया अध्ययन
दुनिया भर में बढ़ते अंतरिक्ष मलबे के प्रति चिंता के बीच, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण और सुखद जानकारी साझा की है। ISRO की हालिया रिसर्च के अनुसार, सूर्य की सक्रियता पुराने और खराब सैटेलाइट्स को पृथ्वी की ओर खींचने में मदद कर रही है, जिससे अंतरिक्ष में सफाई हो रही है। विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC) के वैज्ञानिकों ने पहली बार यह सिद्ध किया है कि सूर्य के 11 साल के सौर चक्र की गतिविधि लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में मौजूद मलबे की ऊंचाई को प्रभावित करती है.
सौर चक्र का प्रभाव
उनके निष्कर्ष, जो 'फ्रंटियर्स इन एस्ट्रोनॉमी एंड स्पेस साइंसेज़' में प्रकाशित हुए हैं, भविष्य के सैटेलाइट मिशनों की योजना में बदलाव ला सकते हैं। रिसर्च में बताया गया है कि जब सूर्य की सक्रियता अपने 11 साल के सौर चक्र के दौरान अपने चरम पर पहुँचती है, तो ऑर्बिट में मौजूद मलबा तेजी से नीचे आने लगता है.
महत्वपूर्ण खोज
मुख्य लेखक आयशा एम. अशरफ़ ने कहा, "हमने दिखाया है कि जब सूर्य अधिक सक्रिय होता है, तो धरती के चारों ओर मौजूद अंतरिक्ष का मलबा तेजी से ऊंचाई खोता है।" यह खोज एक महत्वपूर्ण समय पर आई है, क्योंकि लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) अब सैटेलाइट्स, रॉकेट के छोड़े हुए हिस्सों और टकराव से बने मलबे से भरा हुआ है.
टकराव का खतरा
वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि एक भी टक्कर से मलबे की एक श्रृंखला शुरू हो सकती है, जिससे हजारों नए टुकड़े बन सकते हैं। टीम ने 1960 के दशक में छोड़े गए मलबे के 17 टुकड़ों की गति पर नज़र रखी और 36 वर्षों तक उनके ऑर्बिट में गिरावट का अध्ययन किया.
सूर्य की गतिविधि का प्रभाव
जब सूर्य अधिक सक्रिय होता है, तो वह तेज़ अल्ट्रावॉयलेट किरणें और आवेशित कण छोड़ता है, जिससे पृथ्वी के वायुमंडल की ऊपरी परत गर्म होकर फैलती है। इससे कक्षीय ऊंचाइयों पर वायुमंडलीय घनत्व बढ़ता है, जिससे उपग्रहों और मलबे पर खिंचाव बढ़ता है.
शोध के परिणाम
शोधकर्ताओं ने मलबे के प्रक्षेप पथों को दीर्घकालिक सौर आंकड़ों से जोड़ा और पाया कि सौर गतिविधि के चरम स्तर को पार करने के बाद एक स्पष्ट "संक्रमण सीमा" होती है. अशरूफ ने कहा, "हमारे परिणाम बताते हैं कि जब सौर गतिविधि कुछ निश्चित स्तरों को पार कर जाती है, तो उपग्रह तेजी से ऊंचाई खो देते हैं, जिससे अधिक कक्षा सुधारों की आवश्यकता होती है."
भविष्य की चुनौतियाँ
इन निष्कर्षों का उपग्रह संचालकों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है, खासकर जब सरकारें और निजी कंपनियाँ पहले से ही भीड़भाड़ वाली कक्षाओं में नए अंतरिक्ष यान लॉन्च कर रही हैं. शोधकर्ताओं का कहना है कि यह अध्ययन दशकों पुराने अंतरिक्ष मलबे के अप्रत्याशित वैज्ञानिक महत्व को भी उजागर करता है.
