सुप्रीम कोर्ट में सबरीमाला मंदिर मामले पर केंद्र का नया हलफनामा
केंद्र सरकार ने सबरीमाला मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट में अपना लिखित उत्तर प्रस्तुत किया है, जिसमें 10 से 50 वर्ष की आयु की महिलाओं के प्रवेश पर रोक के कारणों का स्पष्टीकरण दिया गया है। यह मामला केरल विधानसभा चुनावों से पहले महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह धार्मिक परंपराओं और व्यक्तिगत समानता के अधिकार के बीच संतुलन बनाने की चुनौती पेश करता है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई आज से शुरू हो रही है, जो इस संवेदनशील मुद्दे पर एक नया मोड़ ला सकती है।
| Apr 7, 2026, 10:27 IST
केंद्र सरकार का जवाब
केरल विधानसभा चुनावों से पहले, केंद्र सरकार ने सबरीमाला मंदिर से संबंधित मामले में सुप्रीम कोर्ट में अपना लिखित उत्तर प्रस्तुत किया है। सरकार ने बताया कि 10 से 50 वर्ष की आयु की महिलाओं के मंदिर में प्रवेश पर रोक किसी प्रकार की 'अशुद्धि' या भेदभाव का परिणाम नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य भगवान अयप्पा की "नैष्ठिक ब्रह्मचारी" परंपरा और मंदिर की स्थापित रीतियों की रक्षा करना है।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई
इस उत्तर में कहा गया है कि इस आयु वर्ग की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति देने से पूजा के पारंपरिक तरीकों और देवता के स्वरूप में बदलाव आ सकता है, जो संविधान के तहत धार्मिक बहुलवाद को प्रभावित कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की संवैधानिक पीठ आज से इस मामले की सुनवाई शुरू करेगी।
राजनीतिक और सामाजिक संदर्भ
राजनीतिक और सामाजिक महत्व
केरल में चुनावों से पहले केंद्र का यह हलफनामा महत्वपूर्ण है। सबरीमाला का मुद्दा राज्य में हमेशा से संवेदनशील और भावनात्मक रहा है। 2018 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, जिसमें सभी आयु की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी गई थी, बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे।
कानूनी लड़ाई का नया मोड़
अब, केंद्र सरकार द्वारा परंपराओं के समर्थन में खड़े होने से इस कानूनी लड़ाई में एक नया मोड़ आया है। कोर्ट को यह तय करना है कि 'व्यक्तिगत समानता का अधिकार' और 'धार्मिक संस्थाओं की परंपराओं को बनाए रखने की स्वतंत्रता' के बीच संतुलन कैसे स्थापित किया जाए।
