सुप्रीम कोर्ट में महिला जजों की संख्या पर उठे सवाल, जस्टिस पंचोली की नियुक्ति पर विवाद
अगस्त 2021 में सुप्रीम कोर्ट में तीन महिला जजों की नियुक्ति के बाद, अब केवल एक महिला जज बची हैं। जस्टिस बीवी नागरत्ना ने जस्टिस पंचोली की नियुक्ति पर आपत्ति जताई है, जिसे न्याय प्रशासन के लिए हानिकारक बताया गया है। जानें इस विवाद के पीछे की वजह और कॉलेजियम प्रणाली की भूमिका।
Aug 30, 2025, 18:23 IST
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महिला जजों की ऐतिहासिक नियुक्ति
अगस्त 2021 में एक महत्वपूर्ण घटना घटी जब सुप्रीम कोर्ट में एक साथ तीन महिला जजों की नियुक्ति की गई। इस समय जस्टिस हीमा कोहली, बीवी नागरत्ना और बेला त्रिवेदी ने सुप्रीम कोर्ट में प्रवेश किया, जिससे कुल चार महिला जज एक साथ बैठीं, जिसमें जस्टिस इंदिरा बनर्जी पहले से मौजूद थीं। उस समय कोलेजियम की सिफारिश और सरकार की त्वरित मंजूरी को ऐतिहासिक माना गया। यह इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में केवल आठ महिला जजें नियुक्त की गई थीं। 2021 में तीन मुख्य न्यायाधीश, सीजेआई यूयू ललित, डीवाई चंद्रचूड़, और जस्टिस संजीव खन्ना, अपने कार्यकाल को समाप्त कर चुके हैं। हालांकि, इस अवधि में एक भी महिला जज की नियुक्ति नहीं हुई। वर्तमान में, सुप्रीम कोर्ट के 32 जजों में केवल एक महिला जज, जस्टिस बीवी नागरत्ना, हैं। जस्टिस बीआर गवई का कार्यकाल भी इसी दिशा में बढ़ता दिख रहा है। यह स्पष्ट रूप से कॉलेजियम की बैठक में सामने आया।
कॉलेजियम प्रणाली का महत्व
कॉलेजियम प्रणाली का अर्थ है जजों की नियुक्ति के लिए एक ऐसा तंत्र, जिसमें जज आपस में मिलकर निर्णय लेते हैं। इस प्रणाली में सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं होता है। इसका मतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज तय करते हैं कि कौन नया जज बनेगा और किस हाई कोर्ट के जज को सुप्रीम कोर्ट में लाया जाएगा। हाल ही में इस प्रणाली को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है, जिसके बाद विवाद उत्पन्न हुआ है।
नवीनतम नियुक्तियों पर विवाद
केंद्र सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस आलोक अराधे और पटना हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस विपुल मनुभाई पंचोली को सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है। यह नोटिफिकेशन कॉलेजियम की सिफारिश के दो दिन बाद जारी किया गया। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सोशल मीडिया पर बताया कि राष्ट्रपति ने भारत के चीफ जस्टिस से परामर्श के बाद इन नियुक्तियों को मंजूरी दी है। इन नियुक्तियों के साथ सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या फिर से 34 हो जाएगी। हालांकि, जस्टिस पंचोली की नियुक्ति पर विवाद उठ खड़ा हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कॉलेजियम की बैठक में जस्टिस बीवी नागरत्ना ने उनके नाम का विरोध किया था। उन्होंने उनकी वरिष्ठता में कम रैंक का हवाला दिया और उनके गुजरात हाई कोर्ट से पटना हाई कोर्ट में ट्रांसफर के कारणों पर भी सवाल उठाए।
जस्टिस पंचोली की नियुक्ति पर आपत्ति
जस्टिस बीवी नागरत्ना ने जस्टिस विपुल पंचोली की नियुक्ति पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि यह नियुक्ति न्याय प्रशासन के लिए हानिकारक होगी और कॉलेजियम प्रणाली की विश्वसनीयता को खतरे में डालेगी। जस्टिस नागरत्ना, जो कॉलेजियम की एकमात्र महिला सदस्य हैं, ने जस्टिस पंचोली के गुजरात हाई कोर्ट से पटना हाई कोर्ट में स्थानांतरण को लेकर भी सवाल उठाए। रिपोर्टों के अनुसार, जस्टिस पंचोली की वरिष्ठता सूची में 57वां स्थान है, और उनकी नियुक्ति से यह स्पष्ट होता है कि कई अन्य योग्य जजों की अनदेखी की गई है। जस्टिस नागरत्ना ने यह भी बताया कि गुजरात हाई कोर्ट का पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में प्रतिनिधित्व है, और तीसरे जज की नियुक्ति से संतुलन बिगड़ जाएगा। वर्तमान में, जस्टिस नागरत्ना भारत की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनने की कतार में हैं, और उनका कार्यकाल 2027 से शुरू होगा।