सुप्रीम कोर्ट में पहुंची CBSE की नई तीन-भाषा नीति पर चुनौती

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की नई तीन-भाषा नीति को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि बच्चों के लिए अचानक तीन भाषाएं सीखना संभव नहीं है। इस नीति के तहत कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य किया गया है, जिसमें कम से कम दो भारतीय भाषाएँ होनी चाहिए। जानें इस नीति के नियम और सुप्रीम कोर्ट में इसकी सुनवाई की तिथि।
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सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की नई तीन-भाषा नीति अब सर्वोच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका के माध्यम से चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता के वकील मुकुल रोहतगी ने अदालत में यह मामला प्रस्तुत करते हुए कहा कि बच्चों के लिए अचानक तीन भाषाएं सीखना और फिर कक्षा 10 की परीक्षा देना संभव नहीं है, जिससे अराजकता उत्पन्न हो सकती है। मुख्य न्यायाधीश ने इस मामले की सुनवाई अगले सप्ताह करने का आश्वासन दिया।


सीबीएसई ने 1 जुलाई से कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य कर दिया है, लेकिन कक्षा 10 में तीसरी भाषा के लिए कोई बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। परिपत्र में यह स्पष्ट किया गया है कि 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 के लिए तीन भाषाओं (आर1, आर2, आर3) का अध्ययन अनिवार्य होगा, जिनमें से कम से कम दो भाषाएँ भारतीय मूल की होनी चाहिए।


नई नीति के अनुसार भाषा अध्ययन

सीबीएसई के परिपत्र के अनुसार, यह नीति राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और राष्ट्रीय विद्यालय शिक्षा पाठ्यक्रम ढांचा (एनसीएफ-एसई) 2023 के अनुरूप है। इसमें कहा गया है कि तीन भाषाओं में से कम से कम दो भारतीय मूल की भाषाएँ होनी चाहिए। CBSE के माध्यमिक विद्यालय के पाठ्यक्रम के अनुसार, भाषाओं को तीन स्तरों में विभाजित किया जाएगा - आर1, आर2 और आर3। आर1 (भाषा 1) छात्र की मुख्य भाषा होगी, आर2 एक अलग भाषा होगी, और आर3 (तीसरी भाषा) शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 6 से अनिवार्य होगी और 2030-31 तक कक्षा 10 तक पूरी तरह से लागू हो जाएगी।


भाषाओं का चयन और नियम

आर1 और आर2 में चुनी गई भाषाएँ एक समान नहीं हो सकतीं और इन्हें एक से अधिक स्तरों पर एक साथ नहीं पढ़ाया जा सकता। सीबीएसई की अधिसूचना में उल्लेख किया गया है कि भारत की दो आधिकारिक भाषाएँ, हिंदी और अंग्रेजी, और 42 अन्य भाषाएँ भी शामिल हैं। इसके अलावा, भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में सूचीबद्ध सभी अनुसूचित भाषाओं के अतिरिक्त अन्य भारतीय क्षेत्रीय भाषाएँ और विदेशी भाषाएँ भी पढ़ाई जा रही हैं।