सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों के मुद्दे पर सुनवाई जारी
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का सारांश
सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों (stray dogs) के मामले पर जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच के साथ 7 जनवरी (बुधवार) को विस्तृत सुनवाई की, जो 8 जनवरी (गुरुवार) को भी जारी रही। अदालत ने मानव सुरक्षा और जानवरों के कल्याण के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया और नगर निकायों की लापरवाही पर कड़ी टिप्पणी की।
सुनवाई के मुख्य बिंदु:
- कोर्ट ने कहा कि किसी भी कुत्ते के “मूड” का अनुमान लगाना संभव नहीं है – यह पता लगाना मुश्किल है कि वह काटेगा या नहीं। “रोकथाम इलाज से बेहतर है” (prevention is better than cure) पर जोर दिया गया।
- सिर्फ काटने की घटनाएं ही नहीं, बल्कि सड़कों पर आवारा जानवरों के कारण हादसे भी हो रहे हैं, जिससे जानें जा रही हैं।
- एक टिप्पणी में कोर्ट ने पूछा: “अन्य जानवरों की जिंदगी का क्या? मुर्गियों और बकरियों का क्या? क्या उनकी जिंदगी का कोई मूल्य नहीं है?”
- कोर्ट ने नवंबर 2025 के अपने आदेश को स्पष्ट किया कि संवेदनशील सार्वजनिक स्थानों (जैसे स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन) से कुत्तों को हटाकर शेल्टर में स्थानांतरित किया जाए, सभी कुत्तों को मारने या हटाने का आदेश नहीं है।
- सभी पक्षों (कुत्ते के काटने के शिकार, जानवर प्रेमी, विरोधी) की दलीलें सुनी जा रही हैं। सुनवाई जारी है।
सोनम वांगचुक का मामला:
जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो द्वारा दायर याचिका (NSA के तहत हिरासत को चुनौती) पर सुनवाई 7 जनवरी को शुरू होने वाली थी, लेकिन इसे 8 जनवरी (आज) के लिए स्थगित कर दिया गया। आज इस पर सुनवाई हो रही है या हो चुकी होगी। याचिका में हिरासत को अवैध और मनमाना बताया गया है, जो सितंबर 2025 की लद्दाख हिंसा से संबंधित है।
अरावली मुद्दा:
आपके संदेश में “राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में रहने वाले अरावली मुद्दे” का जिक्र है, लेकिन जनवरी 2026 में इस पर सुप्रीम कोर्ट में आज कोई सुनवाई नहीं है। अरावली हिल्स की परिभाषा और खनन से संबंधित मामला दिसंबर 2025 में चर्चा में था, जहां कोर्ट ने अपने नवंबर 2025 के फैसले को स्थगित कर नई विशेषज्ञ समिति बनाने का विचार किया। अगली सुनवाई 21 जनवरी 2026 को होगी। शायद पुरानी खबर का मिश्रण हो।
