सुप्रीम कोर्ट ने सोनम रघुवंशी की ज़मानत रद्द की, हत्या के आरोप में सरेंडर का आदेश
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
गुरुवार को, सुप्रीम कोर्ट ने सोनम रघुवंशी की ज़मानत को रद्द कर दिया। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने पति राजा रघुवंशी की हनीमून के दौरान हत्या की। कोर्ट ने सोनम को तीन हफ्तों के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। हालांकि, यदि ट्रायल में देरी होती है, तो वह छह महीने बाद फिर से ज़मानत के लिए आवेदन कर सकती हैं। मेघालय सरकार ने सोनम को दी गई ज़मानत को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। 28 अप्रैल को, शिलांग की एक अदालत ने उन्हें ज़मानत दी थी। उल्लेखनीय है कि इंदौर के व्यवसायी राजा रघुवंशी की मई 2025 में मेघालय के ईस्ट खासी हिल्स ज़िले में हत्या कर दी गई थी। आरोप है कि उनकी हत्या तीन हत्यारों ने की थी। यह व्यवसायी अपनी पत्नी के साथ हनीमून मनाने वहां गए थे।
कोर्ट की सुनवाई में क्या हुआ?
सुनवाई के दौरान, सोनम के वकील ने बताया कि इस मामले में कुल 94 गवाहों के नाम शामिल हैं, जिनमें से अब तक केवल चार के बयान दर्ज किए गए हैं। एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी पेश की गई है, और उन्हें कड़ी शर्तों के साथ ज़मानत दी गई थी। वकील ने यह भी कहा कि सोनम ने सरेंडर नहीं किया है; उन्हें गाज़ीपुर में गिरफ्तार किया गया था, और यह गिरफ्तारी सरेंडर के रूप में गलत तरीके से प्रस्तुत की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि सोनम अपनी ज़मानत की शर्तों का पालन कर रही हैं और उनके भागने का कोई खतरा नहीं है। मेघालय सरकार की ओर से पेश हुए SG तुषार मेहता ने कहा कि गिरफ्तारी के आधार बेबुनियाद हैं क्योंकि आरोपी ने खुद को प्रस्तुत किया था, जैसा कि चार्जशीट में उल्लेखित है।
सुप्रीम कोर्ट का दृष्टिकोण
पिछली सुनवाई में, सुप्रीम कोर्ट ने सोनम के वकील को दो विकल्प दिए थे: या तो सोनम सरेंडर करें या फिर कोर्ट उनकी ज़मानत रद्द करने पर निर्णय ले। सुप्रीम कोर्ट में अपने जवाब में, सोनम ने खुद को निर्दोष बताया और कहा कि उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया गया है। उनका कहना था कि अभियोजन पक्ष का मामला केवल परिस्थितिजन्य सबूतों पर आधारित है, इसलिए उन्हें केवल आरोपों के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता। SG मेहता ने कोर्ट को बताया कि दस्तावेज़ में कानूनी धारा का उल्लेख करते समय एक टाइपिंग की गलती हुई थी। उन्होंने तर्क दिया कि इतनी छोटी तकनीकी गलती के आधार पर ज़मानत नहीं दी जानी चाहिए। मेहता ने कहा कि यदि सोनम की ज़मानत बरकरार रखी गई, तो उसके भागने की संभावना है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बदलते समाज में ये चीज़ें अपरिहार्य हैं।
