सुप्रीम कोर्ट ने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार की पुष्टि की, गाइडलाइंस बनाने का संकेत
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को संवैधानिक सुरक्षा प्रदान की और संकेत दिया कि वह देशभर में प्रदर्शनों के लिए गाइडलाइंस बनाने पर विचार कर रहा है। अदालत ने कहा कि नागरिकों को शांतिपूर्ण विरोध का पूरा अधिकार है, लेकिन अधिकारियों को असामाजिक तत्वों से निपटने के लिए एक स्पष्ट योजना होनी चाहिए। यह निर्णय NEET-UG पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस की ज्यादतियों के संदर्भ में आया है। जानें इस महत्वपूर्ण निर्णय के बारे में और अधिक जानकारी।
| Jul 27, 2026, 12:47 IST
सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार एक संवैधानिक सुरक्षा है, जिसे कम नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही, अदालत ने यह भी संकेत दिया कि वह देशभर में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए एक समान नियमावली बनाने पर विचार कर सकती है। शीर्ष अदालत ने कहा कि नागरिकों को शांतिपूर्ण विरोध का पूरा अधिकार है, लेकिन अधिकारियों को असामाजिक तत्वों से निपटने के लिए एक स्पष्ट योजना भी होनी चाहिए। ये टिप्पणियाँ उन याचिकाओं के दौरान की गईं, जिनमें NEET-UG पेपर लीक और शिक्षा प्रणाली में अन्य गड़बड़ियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस की ज्यादतियों का आरोप लगाया गया था।
विरोध-प्रदर्शनों के लिए गाइडलाइंस की आवश्यकता
सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश में विरोध-प्रदर्शनों के लिए गाइडलाइंस बनाने का संकेत दिया
मुख्य न्यायाधीश (CJI) और जस्टिस जॉयमाल्य बागची तथा जस्टिस वी मोहना की बेंच ने कहा कि इस विषय पर राष्ट्रीय स्तर पर विचार करने की आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शनों के लिए एक मानक प्रोटोकॉल नागरिकों के अधिकारों और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन बनाने में मदद कर सकता है। सुनवाई के दौरान, CJI ने कहा कि जब कोई शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करना चाहता है, तो इसके लिए एक प्रोटोकॉल होना चाहिए। इसके लिए सही स्थान का चयन आवश्यक है। यदि कोई असामाजिक तत्व है, तो उससे निपटा जा सकता है। यदि कोई ज्यादती होती है, तो उसकी स्वतंत्र रूप से जांच होनी चाहिए। यह केवल दिल्ली का मामला नहीं है। प्रोटोकॉल में एकरूपता आवश्यक है। केवल इसलिए कि विरोध हो रहा है, इसका मतलब लाठी-चार्ज नहीं है। लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अनुशासन आवश्यक है।
शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार
'शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार से इनकार नहीं किया जा सकता'
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को मिलने वाली संवैधानिक सुरक्षा को केवल इसलिए कम नहीं किया जा सकता कि प्रदर्शन हो रहे हैं। कानूनी स्थिति को दोहराते हुए CJI ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार संविधान में निहित है। यह अधिकार पूरी तरह से सुरक्षित है और इससे इनकार नहीं किया जा सकता। केवल इसलिए कि विरोध-प्रदर्शन हो रहा है, पुलिस की ज्यादती को सही नहीं ठहराया जा सकता। अदालत की यह टिप्पणी उन आरोपों के संदर्भ में आई है, जिनमें कहा गया था कि NEET-UG पेपर लीक के आरोपों को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने अत्यधिक बल का प्रयोग किया, जिसमें लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल भी शामिल था।
