सुप्रीम कोर्ट ने लालू यादव को चारा घोटाले में दी राहत, ज़मानत रद्द करने से किया इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव को देवघर चारा घोटाले में राहत देते हुए उनकी ज़मानत रद्द करने की सीबीआई की याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने हाई कोर्ट को निर्देश दिया कि वह मामले की सुनवाई में तेजी लाए। जस्टिस एमएम सुंदरेश और पीबी वराले की बेंच ने कहा कि ज़मानत के आदेश पर पुनर्विचार करने के बजाय अपीलों पर तेजी से सुनवाई की जाएगी। जानें इस महत्वपूर्ण मामले के बारे में और क्या कहा गया कोर्ट में।
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सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय

मंगलवार को बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव को देवघर चारा घोटाले से संबंधित मामले में सुप्रीम कोर्ट से महत्वपूर्ण राहत मिली। कोर्ट ने उनकी ज़मानत रद्द करने की याचिका को खारिज कर दिया। इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने और सीबीआई की याचिका पर कोई निर्णय देने से भी इनकार कर दिया। जस्टिस एमएम सुंदरेश और पीबी वराले की बेंच ने मामले की सुनवाई की और हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया, लेकिन यह निर्देश दिया कि ट्रायल कोर्ट के निर्णय के खिलाफ यादव की अपील पर तेजी से सुनवाई की जाए।


सीबीआई की अपील पर कोर्ट का रुख

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई द्वारा ज़मानत रद्द करने की अपील को अस्वीकार कर दिया और हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया। कोर्ट ने कहा कि वह हाई कोर्ट के आदेश में दखल नहीं देना चाहता, खासकर जब से सात साल बीत चुके हैं; सीबीआई की अपील 2018 की है। कोर्ट ने हाई कोर्ट को निर्देश दिया कि लालू यादव के मामले की सुनवाई में तेजी लाए।


लालू यादव की ज़मानत पर बहस

सीबीआई की ओर से ASG SV Raju ने तर्क दिया कि लालू की ज़मानत याचिका पहले दो बार खारिज हो चुकी थी। हालांकि, बाद में हाई कोर्ट ने यह कहते हुए ज़मानत दी कि उन्होंने अपनी सज़ा का 50% हिस्सा पूरा कर लिया था, जो तथ्यों के अनुसार गलत था। लालू यादव की ओर से सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि क्रिमिनल प्रोसीजर कोड की धारा 427 केवल अंतिम निर्णय के चरण में लागू होगी, न कि सज़ा को अस्थायी रूप से रोकने के समय।


सुप्रीम कोर्ट की बेंच का संकेत

इसके बाद, सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने संकेत दिया कि वह ज़मानत के आदेश पर पुनर्विचार करने के बजाय अपीलों पर तेजी से सुनवाई करने के पक्ष में है। बेंच ने कहा कि हमें ट्रायल में तेजी लानी होगी। यदि हम अपील पर तेजी से सुनवाई करें तो क्या होगा? हो सकता है कि हम चुनौती दिए गए आदेश में हस्तक्षेप न करें।


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