सुप्रीम कोर्ट ने लालू यादव के खिलाफ सीबीआई की कार्रवाई को बरकरार रखा
सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय
सोमवार को भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 'जमीन के बदले नौकरी' घोटाले में आरजेडी के नेता लालू प्रसाद यादव के खिलाफ सीबीआई द्वारा दायर एफआईआर और चार्जशीट को रद्द करने की मांग को खारिज कर दिया। इस फैसले ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री के लिए एक कानूनी झटका उत्पन्न किया। न्यायालय ने यादव और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ एफआईआर और संबंधित कार्यवाही को रद्द करने की याचिका को अस्वीकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने उन्हें निचली अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने से छूट प्रदान की।
न्यायालय की सुनवाई और निर्णय
न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने यादव को सुनवाई के दौरान निचली अदालत में उपस्थित होने से छूट दी। सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के संदर्भ में अपनी दलीलें पेश करने की अनुमति दी। इससे पहले, दिल्ली उच्च न्यायालय ने 24 मार्च को यादव और उनके परिवार से जुड़े मामले में सीबीआई द्वारा दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार कर दिया था।
घोटाले का विवरण
अदालत ने यादव की इस दलील को खारिज कर दिया कि एजेंसी की कार्रवाई कानूनी रूप से सही नहीं है, क्योंकि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी। अधिकारियों के अनुसार, यह मामला लालू प्रसाद के रेल मंत्री रहते हुए (2004 से 2009) मध्य प्रदेश के जबलपुर में भारतीय रेलवे के पश्चिम मध्य जोन में 'ग्रुप डी' नियुक्तियों से संबंधित है। ये नियुक्तियां कथित तौर पर यादव के परिवार या सहयोगियों के नाम पर उपहार स्वरूप दी गई भूमि के बदले की गई थीं।
