सुप्रीम कोर्ट ने महुआ मोइत्रा के खिलाफ सीबीआई आरोपपत्र पर रोक लगाई
सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय
दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को रोक लगा दी, जिसमें लोकपाल को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की नेता महुआ मोइत्रा के खिलाफ सीबीआई को आरोपपत्र दाखिल करने की अनुमति दी गई थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने लोकपाल की याचिका पर मोइत्रा, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और शिकायतकर्ता भाजपा सांसद निशिकांत दुबे को नोटिस जारी किया।
दिल्ली उच्च न्यायालय का आदेश
दिल्ली उच्च न्यायालय ने 19 दिसंबर 2025 को लोकपाल के एक आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें सीबीआई को मोइत्रा के खिलाफ नकद घोटाले में आरोपपत्र दाखिल करने की अनुमति दी गई थी। उच्च न्यायालय ने अपने निर्णय के पैरा 89 में कहा था कि लोकपाल से अनुरोध है कि वे लोकपाल अधिनियम की धारा 20 के तहत स्वीकृति प्रदान करने के लिए, एक महीने के भीतर अपने विचार प्रस्तुत करें।
नकद मामले की जानकारी
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने लोकपाल अधिनियम की धारा 20 के तहत शक्तियों और प्रक्रियाओं से संबंधित कई याचिकाओं पर नोटिस जारी करते हुए उच्च न्यायालय के फैसले के अनुच्छेद 89 पर रोक लगा दी। यह मामला इस आरोप से संबंधित है कि मोइत्रा ने एक व्यवसायी से नकद और उपहार लेकर लोकसभा में प्रश्न पूछे थे। उच्च न्यायालय का निर्णय मोइत्रा की उस याचिका पर आया था, जिसमें उन्होंने 12 नवंबर, 2025 के लोकपाल आदेश को चुनौती दी थी।
