सुप्रीम कोर्ट ने छात्र प्रदर्शनों पर पुलिस की कार्रवाई की स्वतंत्र जांच की मांग की

सुप्रीम कोर्ट ने छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर चिंता जताई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि इन घटनाओं की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी आंदोलन के चलते पुलिस की ज्यादतियों को सही नहीं ठहराया जा सकता। दिल्ली और बिहार में हाल के प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठे हैं, जिसमें कई लोग घायल हुए हैं। जानें इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का क्या कहना है।
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पुलिस की ज्यादतियों पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को देश के विभिन्न हिस्सों में छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई पर दायर याचिकाओं की सुनवाई करते हुए यह सवाल उठाया कि जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र जांच क्यों नहीं कराई जानी चाहिए। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हुई घटनाओं की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच आवश्यक है। उन्होंने यह भी बताया कि लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन एक महत्वपूर्ण तत्व हैं, और पुलिस की प्रतिक्रिया को नियंत्रित करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देशों की आवश्यकता है।


पुलिस की ज्यादतियों को सही ठहराने का कोई आधार नहीं

यह टिप्पणी तीन जजों की बेंच द्वारा की गई थी, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत शामिल थे। बेंच ने कहा कि किसी आंदोलन के चलते पुलिस की ज्यादतियों को सही नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि असामाजिक तत्वों की गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।


दिल्ली और बिहार में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई

पिछले हफ्ते, दिल्ली के जंतर-मंतर और अन्य शहरों में पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठे हैं। दिल्ली में, प्रदर्शनकारियों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया, जिससे कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। वहीं, बिहार में पुलिस की फायरिंग में तीन लोग घायल हुए, और एक पुलिसकर्मी को निलंबित किया गया है, जिसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था जिसमें वह AK-47 से फायरिंग करता नजर आया।