सुप्रीम कोर्ट ने एनईपी 2020 की तीन-भाषा नीति पर उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत सीबीएसई की तीन-भाषा नीति पर सुनवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए। मुख्य न्यायाधीश ने अंग्रेजी को भारतीय मूल की भाषा मानने की संभावना पर चर्चा की और नीति में मौजूद समस्याओं को उजागर किया। याचिकाकर्ताओं ने नीति के कार्यान्वयन पर चिंता व्यक्त की, जबकि वकीलों ने बच्चों की शिक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर इसके प्रभाव को रेखांकित किया। इस सुनवाई में भाषा शिक्षा के महत्व और पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता पर भी चर्चा की गई।
| Jul 15, 2026, 13:08 IST
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में उठे महत्वपूर्ण प्रश्न
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत सीबीएसई द्वारा लागू की जा रही तीन-भाषा नीति को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई के दौरान यह सवाल उठाया कि क्या अंग्रेजी को भारतीय मूल की भाषा माना जा सकता है। मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि बोर्ड द्वारा हाल ही में जारी स्पष्टीकरणों के बावजूद नीति में कई समस्याएं बनी हुई हैं। मामले की सुनवाई के दौरान, न्यायमूर्ति जे जॉयमाल्य बागची ने नीति में प्रयुक्त शब्दावली पर सवाल उठाया और यह सुझाव दिया कि भारतीय मूल की भाषा की परिभाषा पर पुनर्विचार की आवश्यकता हो सकती है। संविधान के अनुसार, भारतीय भाषाओं को अपनाना एक संवैधानिक लक्ष्य है।
भाषा के चुनाव का अधिकार और चिंताएं
सीनियर वकील गोपाल शंकरनारायणन ने याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश होते हुए कहा कि यह नीति भाषाओं के चुनाव का अधिकार राज्यों पर छोड़ती है, लेकिन इसके कार्यान्वयन के तरीके पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि राज्यों को चुनाव का अधिकार दिया गया है।
भाषा सीखने का महत्व
भाषा सीखना कभी बेकार नहीं जाता
उन्होंने अदालत को बताया कि NCERT ने अभी तक वादा किया गया लर्निंग मटीरियल बड़े पैमाने पर उपलब्ध नहीं कराया है। शंकरनारायणन ने कहा कि NCERT की वेबसाइट पर केवल 3 किताबें उपलब्ध थीं, जबकि 22 किताबें होनी चाहिए थीं। बच्चों को कहा जा रहा है कि वे अंग्रेजी और अन्य विदेशी भाषाएँ छोड़कर अपनी स्थानीय भाषाएँ अपनाएँ। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि "भाषा सीखना कभी बेकार नहीं जाता", जब सुप्रीम कोर्ट ने 2026-27 शैक्षणिक वर्ष के लिए CBSE की तीन-भाषा नीति पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि, CJI ने यह भी कहा कि CBSE द्वारा जारी सर्कुलर के बावजूद, याचिकाकर्ताओं की चिंताओं का समाधान नहीं हुआ है।
पाठ्यपुस्तकों की तैयारी और शिक्षकों की तैयारी
गोपाल शंकरनारायणन ने आगे कहा कि स्कूलों को बताया गया था कि 1 जुलाई तक पाठ्यपुस्तकें तैयार हो जाएंगी और शिक्षकों को सभी 22 अनुसूचित भाषाओं में पढ़ाने के लिए तैयार रहना होगा। इससे मौजूदा स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने भी कहा कि नीति में बदलाव के बावजूद चिंताएं बनी हुई हैं। केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि वे 2 सप्ताह में जवाब दाखिल करेंगे, लेकिन CJI ने केंद्र को जल्द जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा, "10 दिनों में दाखिल करें।" याचिकाकर्ता फौज़िया खान की ओर से पेश वकील ने भी बेंच को बताया कि इस नीति का छात्रों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, विशेषकर पिछड़े वर्गों के बच्चों की मानसिक सेहत पर।
