सुप्रीम कोर्ट ने अमित जोगी को दी अंतरिम राहत, आजीवन कारावास पर लगी रोक

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने अमित जोगी को अंतरिम राहत प्रदान की है, जिससे उनकी सज़ा और आजीवन कारावास पर रोक लग गई है। यह मामला एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी की हत्या से जुड़ा है। जोगी ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के फ़ैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें दोषी ठहराया गया था। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के पीछे की कहानी।
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सुप्रीम कोर्ट ने अमित जोगी को दी अंतरिम राहत, आजीवन कारावास पर लगी रोक gyanhigyan

सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्व विधायक और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को अंतरिम राहत प्रदान की है। अदालत ने एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी की हत्या के मामले में उनकी सज़ा और आजीवन कारावास पर रोक लगा दी है। जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और विजय बिश्नोई की बेंच ने यह आदेश जारी किया, जिससे मामले की सुनवाई पूरी होने तक उनकी सज़ा प्रभावी रूप से निलंबित हो गई है। जोगी ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के निर्णय को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था। हाई कोर्ट ने उन्हें बरी किए जाने के फ़ैसले को पलटते हुए उन्हें दोषी ठहराया और आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई थी।


इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने जोगी की याचिका पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस जारी किया था। हाई कोर्ट का यह फ़ैसला सीबीआई द्वारा ट्रायल कोर्ट के बरी करने के फ़ैसले के ख़िलाफ़ दायर अपील पर आया था।


जोगी की याचिका और मामले का विवरण

सुप्रीम कोर्ट में अपनी याचिका में, जोगी ने अपनी सज़ा के बाद निर्धारित समय के भीतर अधिकारियों के सामने सरेंडर करने से छूट की भी मांग की है। यह मामला एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी की 2003 में हुई हत्या से संबंधित है। 2007 में, ट्रायल कोर्ट ने 28 आरोपियों को उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी, लेकिन सबूतों की कमी के कारण अमित जोगी को बरी कर दिया गया था। हालाँकि, हाई कोर्ट ने अब उस फैसले को पलटते हुए उन्हें दोषी ठहराया है और तीन हफ़्तों के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया है।


इस मामले की पिछली सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने जोगी की याचिका पर सीबीआई और छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस जारी किया था, जिसमें उन्होंने हाई कोर्ट द्वारा उन्हें बरी किए जाने के फ़ैसले को चुनौती दी थी।