सुप्रीम कोर्ट ने IPS और IAS अधिकारियों के विवाद को सुलझाने के लिए मध्यस्थता की पेशकश की

सुप्रीम कोर्ट ने IPS अधिकारी डी. रूपा मौदगिल और IAS अधिकारी रोहिणी सिंधुरी के बीच चल रहे विवाद को सुलझाने के लिए मध्यस्थता का आदेश दिया है। यह विवाद फेसबुक पोस्ट से शुरू हुआ था, जिसमें आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला चला। कोर्ट ने पूर्व जज जस्टिस कुरियन जोसेफ को मध्यस्थ नियुक्त किया है। जानें इस विवाद की पूरी कहानी और अदालत की कार्यवाही के बारे में।
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सुप्रीम कोर्ट ने IPS और IAS अधिकारियों के विवाद को सुलझाने के लिए मध्यस्थता की पेशकश की gyanhigyan

सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने IPS अधिकारी डी. रूपा मौदगिल और IAS अधिकारी रोहिणी सिंधुरी को सलाह दी है कि वे अपने लंबे समय से चल रहे विवाद को बातचीत या मध्यस्थता के माध्यम से हल करें। जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच ने इस मामले को आपसी सहमति से सुलझाने की संभावना को देखते हुए, पूर्व जज जस्टिस कुरियन जोसेफ को मध्यस्थ नियुक्त किया। यह निर्णय कर्नाटक के दोनों वरिष्ठ अधिकारियों के बीच फेसबुक पोस्ट को लेकर हुए विवाद के तीन साल बाद आया है, जिसने मानहानि के मुकदमे और ₹1 करोड़ के मुआवजे की मांग को जन्म दिया।


विवाद की शुरुआत

'बार एंड बेंच' की रिपोर्ट के अनुसार, यह विवाद फरवरी 2023 में शुरू हुआ, जब सिंधुरी ने मौदगिल के कुछ फेसबुक पोस्ट देखे। इन पोस्ट में मौदगिल ने सिंधुरी पर आरोप लगाया कि उन्होंने अपनी निजी तस्वीरें अन्य IAS अधिकारियों के साथ साझा की थीं। यह मामला सार्वजनिक हो गया, जिससे दोनों अधिकारियों के बीच तीखी बहस छिड़ गई। विवाद इतना बढ़ गया कि कर्नाटक सरकार को अंततः दोनों अधिकारियों का तबादला करना पड़ा।


कानूनी नोटिस और अदालत की कार्यवाही

रिपोर्ट के अनुसार, इस सार्वजनिक विवाद के बाद, सिंधुरी ने मौदगिल को कानूनी नोटिस भेजा, जिसमें बिना शर्त माफी और ₹1 करोड़ का हर्जाना मांगा गया। उन्होंने कहा कि इन आरोपों ने उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया और उन्हें मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ा। यह मामला अदालत में पहुंच गया, और मार्च 2023 में बेंगलुरु की एक अदालत ने सिंधुरी की आपराधिक मानहानि की शिकायत पर संज्ञान लिया। इसके बाद, मौदगिल ने मामले को रद्द कराने के लिए कर्नाटक उच्च न्यायालय का रुख किया, लेकिन उच्च न्यायालय ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और कहा कि आरोपों की पूरी सुनवाई आवश्यक है।