सुप्रीम कोर्ट की लिव-इन रिलेशनशिप पर महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में लिव-इन रिलेशनशिप में रेप और मारपीट के आरोपों पर सुनवाई की। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने इस मामले में सहमति और रिश्ते की प्रकृति पर महत्वपूर्ण सवाल उठाए। कोर्ट ने बताया कि विवाह के बाहर के रिश्तों में जटिलताएँ हो सकती हैं और महिला की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। जानें इस मामले में कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ और निर्णय।
| Apr 27, 2026, 15:29 IST
महिला के आरोपों पर सुनवाई
हाल ही में, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने एक लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े रेप और मारपीट के मामले की सुनवाई की। इस मामले की सुनवाई जस्टिस बी.वी. नागरत्ना द्वारा की गई। एक महिला ने यह मामला उठाया, जिसमें उसने आरोप लगाया कि एक पुरुष ने शादी का वादा करके उसके साथ मारपीट की।
सहमति और रिश्ते की प्रकृति पर चर्चा
सहमति और रिश्ते की प्रकृति पर सवाल
सुनवाई के दौरान, न्यायालय ने दोनों व्यक्तियों के बीच संबंध की प्रकृति पर ध्यान केंद्रित किया। कोर्ट ने कहा कि दोनों वयस्क थे और लंबे समय तक एक साथ रहे। जस्टिस नागरत्ना ने यह सवाल उठाया कि एक आपसी सहमति से बना रिश्ता कैसे बाद में आपराधिक आरोप में बदल सकता है। महिला ने बिना शादी के उस व्यक्ति से बच्चा भी पैदा किया, और अब वह रेप और मारपीट का आरोप लगा रही है। जज ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में सहमति को समझना आवश्यक है। जब रिश्ता आपसी सहमति से बना हो, तो अपराध का सवाल कैसे उठता है?
लिव-इन रिश्तों में जोखिमों की पहचान
कोर्ट ने लिव-इन रिश्तों में जोखिमों की ओर इशारा किया
न्यायालय ने बताया कि विवाह के बाहर के रिश्तों में कुछ जोखिम हो सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि जब ऐसे रिश्ते समाप्त होते हैं, तो स्थिति अक्सर जटिल हो जाती है। जज ने कहा कि लिव-इन रिश्तों में यही समस्या होती है। वे कई वर्षों तक एक साथ रहते हैं, और जब वे अलग होते हैं, तो महिला शिकायत दर्ज कराती है। यह सब विवाह के बाहर के रिश्तों की जटिलताएँ हैं। सुनवाई के दौरान, महिला के वकील ने कहा कि उसे यह नहीं पता था कि वह व्यक्ति पहले से शादीशुदा है। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि वह केवल मौजूदा मामले के तथ्यों पर ध्यान केंद्रित करेगा। बेंच ने महिला की स्थिति पर चिंता व्यक्त की और कहा कि वह अपने बच्चे के लिए सहायता मांग सकती है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भले ही रिश्ते को कानूनी मान्यता न मिली हो, लेकिन बच्चे के अधिकार महत्वपूर्ण बने रहते हैं।
